आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार के समझौतै अस्वीकार्य...ईस्ट एशिया समिट में बोले एस. जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईस्ट एशिया समिट में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का संदेश दिया. उन्होंने वैश्विक संघर्ष, सुरक्षा, गाजा, यूक्रेन और आसियान साझेदारी पर जोर देते हुए शांति और स्थिरता की आवश्यकता रेखांकित की.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (East Asia Summit) में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक समुदाय को एक सशक्त और स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने आत्मरक्षा के अधिकार पर कभी समझौता नहीं करेगा. जयशंकर ने इस मंच से दुनिया को आगाह किया कि आतंकवाद आज भी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक लगातार बना रहने वाला विनाशकारी खतरा है.

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की अपील

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समुदाय को किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए. उन्होंने इसे एक ऐसी स्थायी और घातक चुनौती बताया, जिसके खिलाफ “जीरो टॉलरेंस नीति” आवश्यक है. भारत की ओर से उन्होंने दोहराया कि किसी भी स्थिति में हमारी रक्षात्मक क्षमता या सुरक्षा हितों से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा.

वैश्विक संकटों पर भारत की चिंता
अपने भाषण में जयशंकर ने गाजा और यूक्रेन जैसे जारी संघर्षों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये युद्ध न केवल मानवता के लिए गहरे संकट पैदा कर रहे हैं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत गाजा में शांति प्रयासों का समर्थन करता है और यूक्रेन युद्ध के शीघ्र समाधान की दिशा में वैश्विक पहल का पक्षधर है.

आसियान और भारत की साझेदारी पर जोर
जयशंकर ने भारत और आसियान देशों के बीच मजबूत साझेदारी पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि भारत पूर्वी एशिया क्षेत्र की शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए समर्पित है. जयशंकर ने बताया कि भारत ने हाल ही में ऊर्जा दक्षता पर ईएएस ज्ञान-साझा कार्यशाला और उच्च शिक्षा संस्थानों के सम्मेलन की मेजबानी की, जिससे क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा मिली है.

भारत का संदेश: सुरक्षा और सहयोग में कोई समझौता नहीं
ईस्ट एशिया समिट में जयशंकर का यह संदेश न केवल भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को मज़बूती देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति, स्थिरता और सहयोग के लिए निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत के लिए सुरक्षा और आत्मरक्षा के अधिकार पर कोई भी समझौता अस्वीकार्य है.

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