ट्रंप ने क्यों लॉन्च किया बोर्ड ऑफ पीस? पाकिस्तान को मिला सदस्य बनने का मौका, अब क्या करेगा भारत! जानिए पूरा माजरा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आज वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान 'बोर्ड ऑफ पीस' का औपचारिक शुभारंभ किया है. इस अंतरराष्ट्रीय संगठन में पाकिस्तान को सदस्य बनने को मौका मिला है, हालांकि भारत के लिए एक नई चुनौती सामने आ गई है.

Sonee Srivastav

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जनवरी 2026 को स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच यानी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान 'बोर्ड ऑफ पीस' का औपचारिक शुभारंभ किया. जिसमे पाकिस्तान को भी सदस्य बनने का मौका मिला है. 'बोर्ड ऑफ पीस' एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी शुरुआत गाजा में चल रहे संघर्ष को स्थायी शांति देने से हुई है, लेकिन ट्रंप इसे वैश्विक स्तर पर विवाद सुलझाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं.

ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन होंगे और उन्होंने दावा किया कि यह संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करेगा, हालांकि कई विशेषज्ञों को लगता है कि यह यूएन की भूमिका को चुनौती दे सकता है. 

ट्रंप का गाजा पर फोकस

ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस को गाजा सीजफायर को मजबूत करने और हमास से हथियार छुड़वाने के लिए लॉन्च किया. उन्होंने साफ कहा कि हमास को हथियार छोड़ने होंगे, वरना यह फिलिस्तीनी आंदोलन का अंत हो सकता है. ट्रंप का कहना है कि बोर्ड बनने के बाद वे दुनिया में लगभग कुछ भी कर सकते हैं. 

शुरू में यह गाजा के पुनर्निर्माण और शांति पर केंद्रित था, लेकिन अब इसका दायरा वैश्विक संघर्षों तक फैल सकता है. ट्रंप ने यूएन की आलोचना करते हुए कहा कि उसमें बहुत क्षमता है, लेकिन उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा. 

पाकिस्तान सहित कई देश हुए शामिल

दावोस में हुए इस समारोह में 20 से ज्यादा देशों के नेता या प्रतिनिधि मौजूद थे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव जैसे कई नेता ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए. 

पाकिस्तान ने अमेरिका के न्योते पर बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया है, ताकि गाजा में स्थायी शांति हो सके. हालांकि, स्थायी सदस्य बनने के लिए हर देश को 1 बिलियन डॉलर का फंड देना होगा. अमेरिका के कई पारंपरिक सहयोगी जैसे यूरोपीय देश अभी इसमें शामिल नहीं हुए हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह यूएन को कमजोर कर सकता है. 

भारत के सामने नई चुनौती 

भारत ने अभी तक बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. भारत हमेशा से संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का समर्थन करता रहा है और वैश्विक शांति के लिए बहुपक्षीय मंचों पर जोर देता है. ट्रंप के इस नए प्रयास से भारत को सावधानी बरतनी पड़ सकती है, क्योंकि यह क्षेत्रीय संतुलन और मध्य पूर्व नीति को प्रभावित कर सकता है. 

पाकिस्तान के शामिल होने से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव वाले मुद्दों पर बोर्ड की भूमिका भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है. भारत शायद यूएन के साथ समन्वय बनाए रखते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा.
 

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