'लानत है ऐसे फैसलों पर...' ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होकर फंस गए शहबाज-मुनीर! भड़क उठा पूरा देश

आज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम से एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाया, जिसमें पाकिस्तान ने सदस्यता पाने के लिए एक अरब डॉलर का भुगतान करने को तैयार हो गया. हालांकि अब वे बूरी तरह से फंस चुकें हैं.

Sonee Srivastav

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम से एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाया है, जो मुख्य रूप से गाजा में स्थायी शांति, युद्धविराम और पुनर्निर्माण पर काम करेगा. इस बोर्ड में शामिल होने के लिए स्थायी सदस्यता की फीस एक अरब डॉलर बताई जा रही है. पाकिस्तान ने ट्रंप के न्योते को स्वीकार कर लिया और दावोस में हुए हस्ताक्षर समारोह में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शामिल हुए.

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह फैसला फिलिस्तीनियों की मदद और गाजा में शांति के लिए है लेकिन इस कदम से शहबाज-मुनीर की सरकार घरेलू स्तर पर बुरी तरह फंस गई है. 

ट्रंप की कृपा पाने की होड़ में लिया फैसला?

शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ट्रंप के साथ मजबूत संबंध बनाने के इच्छुक दिखते हैं. बोर्ड में शामिल होने से पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल सकती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह ट्रंप को खुश करने की कोशिश है. बोर्ड में इजरायल भी शामिल है, जबकि पाकिस्तान ने कभी इजरायल को मान्यता नहीं दी. 

इससे पाकिस्तान के पारंपरिक फिलिस्तीनी समर्थन पर सवाल उठ रहे हैं. सरकार का दावा है कि यह कदम गाजा में मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के लिए है, लेकिन विरोधियों का मानना है कि इससे सिद्धांतों से समझौता हुआ है.

बोर्ड की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने इस फैसले की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि बोर्ड ट्रंप की व्यक्तिगत पहल है और उनके कार्यकाल के बाद इसका अस्तित्व संदिग्ध है. लोधी ने पूछा कि क्या ट्रंप को खुश करना पाकिस्तान के मूल सिद्धांतों से ज्यादा जरूरी हो गया? 

उन्होंने गाजा में इजरायली हमलों की खबरें साझा कर बोर्ड की 'शांति' की परिभाषा पर तंज कसा. इजरायल की मौजूदगी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की नीति के खिलाफ है. 

पूर्व मंत्री और बुद्धिजीवियों का तीखा विरोध

पूर्व कानून मंत्री बाबर अवान ने सरकार पर गद्दारी का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा कि ट्रंप को खुश करने के लिए नेतन्याहू जैसे नेताओं के साथ मंच साझा करना फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ धोखा है. यह कायद-ए-आजम के सिद्धांतों की अवहेलना है. पत्रकार बकीर सज्जाद ने इसे मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी पाखंड वाली राजनीति कहा. उन्होंने तंज कसा कि फिलिस्तीनियों के लिए सिर्फ ट्रंप की चापलूसी ही बची है. 

पूर्व सीनेटर ने बताया 'अमीरों का क्लब' 

पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने बोर्ड को औपनिवेशिक प्रोजेक्ट करार दिया. उन्होंने कहा कि एक अरब डॉलर की एंट्री फीस इसे अमीर देशों का क्लब बना देती है. फैसला बिना संसद या जनता की राय के लिया गया, जो लोकतंत्र की उपेक्षा दिखाता है. ट्रंप को पूरी ताकत मिलने से यह अमेरिकी हितों को बढ़ावा दे सकता है. 

एक्स पर पाकिस्तानी यूजर्स सरकार को शर्मनाक बता रहे हैं. इमरान खान के समर्थक और पूर्व सैनिकों ने कहा कि नेतन्याहू पर युद्ध अपराधों के आरोप हैं, फिर भी उनके साथ बैठना नैतिकता के खिलाफ है. कई यूजर्स ने लिखा, 'लानत है ऐसे फैसलों पर.' फिलिस्तीनियों के दर्द को नजरअंदाज करने का आरोप लग रहा है.
 

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