गंगा जल संधि से सांप्रदायिक मुद्दों तक, तारिक रहमान के सलाहकार के बयान से क्यों बढ़ी सियासी हलचल?

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बीच तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर का भारत और गंगा जल संधि पर दिया गया बयान नई सियासी बहस को जन्म दे रहा है. उनके बयान को नई सरकार की विदेश नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर पड़ सकता है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: बांग्लादेश में हाल ही में हुए आम चुनावों के बाद राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. 12 फरवरी को संपन्न हुए चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को स्पष्ट बहुमत मिला है और तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. नई सरकार के गठन से पहले ही भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है.

इसी क्रम में तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने गंगा जल संधि और भारत की आंतरिक स्थिति पर टिप्पणी कर सियासी हलचल तेज कर दी है. उनके बयान को नई सरकार की संभावित विदेश नीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

गंगा जल संधि पर क्या बोले हुमायूं कबीर?

हुमायूं कबीर ने 1996 में हुई गंगा जल संधि के नवीनीकरण को लेकर स्पष्ट किया कि बांग्लादेश इस मुद्दे पर अपना फैसला 'राष्ट्रीय हित' के आधार पर करेगा. यह संधि इस वर्ष दिसंबर तक रिन्यू की जानी है और माना जा रहा है कि नई सरकार बनने के बाद द्विपक्षीय वार्ताओं में यह अहम मुद्दा रहेगा.

कबीर ने कहा कि अब तक बांग्लादेश को अक्सर उन भारतीय राज्यों के हितों के बारे में बताया जाता रहा है जो नदी जल समझौतों से जुड़े हैं. नई सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा,

“हम ऐसे तरीके से आगे बढ़ेंगे जिससे हमारा राष्ट्रीय हित पूरा हो.”

भारत को लेकर जताई चिंता

अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में सांप्रदायिक घटनाओं में वृद्धि देखी गई. हिंदू समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनीं. हिंदू युवक दीपू दास की लिंचिंग की घटना ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा की थी.

हालांकि इन घटनाओं पर विस्तार से टिप्पणी करने के बजाय हुमायूं कबीर ने भारत की स्थिति को लेकर चिंता जताई. ‘द हिंदू’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा,"भारत में सांप्रदायिक हिंसा चिंता का विषय है. बांग्लादेश के लोगों को लगता है कि भारत असहिष्णु समाज बनता जा रहा है और वहां कट्टरपंथी बयानबाजी के सहारे चुनाव जीते जा रहे हैं, जो चिंताजनक है."

सीमा और बीएसएफ पर भी टिप्पणी

बांग्लादेश की ओर से अक्सर सीमा सुरक्षा बल (BSF) पर नागरिकों की मौत के आरोप लगाए जाते रहे हैं. वहीं भारत का कहना है कि अवैध घुसपैठ की कोशिशों के दौरान ऐसी घटनाएं होती हैं. इस संदर्भ में कबीर ने कहा कि इस तरह की घटनाएं दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करती हैं.

शेख हसीना और अवामी लीग पर बयान

हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि भारत को बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए. उनके अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग अब देश की सक्रिय राजनीति में मौजूद नहीं हैं.

नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले दिए गए इन बयानों को भारत-बांग्लादेश संबंधों में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag