अगर ईरान से परमाणु समझौता नहीं हुआ तो...ट्रंप-नेतन्याहू की हो गई सीक्रेट डील, जिनेवा वार्ता से पहले हुआ बड़ा खुलासा

अमेरिका के साथ दूसरे चरण की बातचीत के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची जिनेवा गए हुए है. लेकिन, परदे के पीछे हालात कुछ और ही है. ट्रंप ने इजरायल के पीएम से कहा है कि यदि ईरान के साथ परमाणु समझौता सफल नहीं रहा तो वह मिसाइल ठिकानों पर हमले का समर्थन करेगा. इसके साथ ही अमेरिका अब इजरायल को हवाई ईंधन और सैन्य मदद देने पर विचार कर रहा है. 

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अमेरिकी प्रशासन और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक रस्साकशी अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है. जिनेवा में होने वाले दूसरे चरण की महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता से पहले पूरे पश्चिम एशिया में सैन्य हलचलें और रणनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ समझौते की उम्मीद जताई है, तो दूसरी तरफ इजरायल को हमले के लिए संभावित समर्थन देकर दबाव बढ़ा दिया है. इस घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति में एक नया और गंभीर तनाव पैदा कर दिया है.

मार-ए-लागो की गुप्त रणनीति

आपको बता दें कि दिसंबर में फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो में हुई एक गोपनीय मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है. सूत्रों का दावा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से साफ कहा है कि यदि परमाणु समझौता सफल नहीं हुआ, तो वे ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर इजरायली हमले का खुला समर्थन करेंगे. इस आश्वासन ने इजरायल को रणनीतिक रूप से अधिक आक्रामक बना दिया है. अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियां हमले की स्थिति में इजरायल की तकनीकी मदद पर विचार कर रही हैं.

अमेरिकी सैन्य सहायता का खाका

इजरायल की संभावित सैन्य कार्रवाई को सफल बनाने के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग के भीतर गहन मंथन शुरू हो चुका है. मुख्य चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अमेरिकी वायुसेना किस तरह इजरायली लड़ाकू विमानों को बीच हवा में ईंधन भरने की महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान कर सकती है. हालांकि, भौगोलिक और कूटनीतिक अड़चनें भी कम नहीं हैं. जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग किसी भी हमले के लिए करने देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है.

युद्धपोतों की भारी तैनाती

कूटनीतिक दबाव के साथ-साथ अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति का व्यापक प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है. पश्चिम एशिया में अब 'यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड' नामक दूसरा विशाल विमानवाहक पोत भेजा जा रहा है. यह कदम पहले से मौजूद सैन्य बेड़े की मारक क्षमता को दोगुना कर देगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे एक एहतियाती तैयारी बताया है ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में अमेरिका तैयार रहे. भारी हथियारों की यह मौजूदगी ईरान को वार्ता के लिए मजबूर करने की एक सोची-समझी रणनीति है.

नेतन्याहू की कड़ी शर्तें

इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने किसी भी समझौते के लिए सुरक्षा के लिहाज से बेहद सख्त शर्तें रखी हैं. उनका दृढ़ मत है कि ईरान के साथ होने वाला सौदा केवल परमाणु संवर्धन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. वे चाहते हैं कि इसमें ईरान के खतरनाक मिसाइल कार्यक्रम और विद्रोही संगठनों को दी जाने वाली फंडिंग पर भी पूर्ण रोक लगाई जाए. नेतन्याहू की इन शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि ईरान केवल सीमित परमाणु कटौती के पक्ष में दिख रहा है.

जिनेवा में वार्ता की आखिरी उम्मीद

इन तमाम सैन्य तैयारियों और तनाव के बीच जिनेवा में मंगलवार को ओमान की मध्यस्थता में दूसरे दौर की निर्णायक बातचीत शुरू होगी. इस बैठक में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे ट्रंप के सबसे भरोसेमंद प्रतिनिधि शामिल होंगे. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया है कि फिलहाल प्राथमिकता कूटनीति ही है, लेकिन सभी सैन्य विकल्प मेज पर खुले रखे गए हैं. पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर हैं क्योंकि इसी से आने वाले समय के वैश्विक सुरक्षा हालात और शांति की दिशा तय होगी.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag