भारत की डिप्लोमेसी से पाकिस्तान फिर रोया खून के आंसू, मोहम्मद बिन जायद संग तीन घंटे की मीटिंग ने पलट दिया पूरा खेल
पाकिस्तान को झटका देते हुए यूएई ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट संचालन प्रस्ताव वापस लिया. वहीं भारत-यूएई रिश्ते मजबूत हुए हैं. बदलती क्षेत्रीय राजनीति में यूएई का भारत की ओर झुकाव और पाकिस्तान से दूरी साफ दिखती है.

नई दिल्लीः पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के हाथों मुंह की खाई है. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन से जुड़ा अपना प्रस्ताव वापस ले लिया. यह परियोजना अगस्त 2025 से विचाराधीन थी और इसे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा था. लेकिन यूएई के इस अचानक फैसले ने इस्लामाबाद की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब यूएई के वरिष्ठ नेता शेख नाहयान एक छोटी सी यात्रा के दौरान भारत आए थे. वह नई दिल्ली में करीब तीन घंटे का रहे. इस यात्रा के बाद आए फैसले को दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसका अप्रत्यक्ष नुकसान पाकिस्तान को होता दिख रहा है.
समझौता क्यों टूटा?
यूएई ने तकनीकी और प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए इस योजना से खुद को अलग कर लिया. रिपोर्ट में कहा गया कि यूएई को कोई ऐसा स्थानीय साझेदार नहीं मिला, जिसे हवाई अड्डे के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जा सके. हालांकि आधिकारिक रूप से इसे राजनीतिक निर्णय नहीं बताया गया, लेकिन इसके पीछे की टाइमिंग कई सवाल खड़े करती है.
खाड़ी देशों में बढ़ता तनाव
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब यूएई और सऊदी अरब के रिश्तों में खटास देखी जा रही है. दोनों देश, जो कभी खाड़ी क्षेत्र के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे, अब यमन संकट को लेकर अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं. इस तनाव का असर उनके रणनीतिक फैसलों पर भी पड़ता दिख रहा है.
उधर, पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत किया है और तुर्की के साथ मिलकर एक कथित इस्लामिक नाटो जैसे ढांचे पर काम कर रहा है. इसके विपरीत, यूएई भारत के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है.
पाकिस्तान-यूएई रिश्तों में आई ठंडक
कभी यूएई पाकिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल था और बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक वहां काम करते थे. रक्षा, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग रहा है. लेकिन बीते वर्षों में कमजोर प्रशासन, नीतिगत अनिश्चितता और बुनियादी ढांचे की जर्जर हालत ने इन संबंधों को प्रभावित किया है.
हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान के सरकारी उपक्रम भारी घाटे में हैं और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते उनका प्रबंधन कमजोर हुआ है. इसी कारण पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस जैसी संस्थाओं का निजीकरण करना पड़ा.
भारत-यूएई रिश्तों में तेजी
जहां पाकिस्तान को झटका लगा है, वहीं भारत-यूएई संबंधों में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है. हाल ही में यूएई ने 900 भारतीय कैदियों की रिहाई को मंजूरी दी, जिसे भारत के प्रति सद्भावना का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद की हालिया मुलाकात में दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई. जारी संयुक्त बयान में दीर्घकालिक भू-राजनीतिक और आर्थिक सहयोग के लिए एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया.
बदलती क्षेत्रीय तस्वीर
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है. यूएई का भारत की ओर झुकाव और पाकिस्तान से दूरी इस नई कूटनीतिक वास्तविकता का संकेत है, जिसके दूरगामी प्रभाव आने वाले वर्षों में और स्पष्ट हो सकते हैं


