पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के सामने कर्ज भरे पाक को संभालना बड़ी चुनौती!

Pakistan: शहबाज शरीफ गठबंधन की सरकार बनाकर पाकिस्तान के 24वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण कर चुके हैं. वहीं अब पाकिस्तान और भारत के लिए कई तरह के सवाल पैदा हो रहे हैं.

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Edited By: JBT Desk

हाइलाइट

  • प्रधानमंत्री बनने के बाद ही शहबाज ने नेशनल असेंबली में कश्मीर के मुद्दे उठा दिया है.
  • बीते 3 मार्च को पाकिस्तान में शहबाज शरीफ ने गठबंधन की सरकार बनाई और पीएम पद की शपथ ली.

Pakistan: पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति पूरी तरह से खराब है, पाक कर्ज में डूबा हुआ है. वहीं अपने कर्ज को चुकाने के लिए वह और अधिक कर्ज ले रहा है. इसलिए पाक की अर्थव्यवस्था बहुत नीचे गिरती जा रही है. साथ ही पाक में भुखमरी जैसे हालात भी नजर आ रहे हैं. जबकि इन हालातों में पाकिस्तान के नए पीएम शहबाज शरीफ के लिए पाकिस्तान का पीएम बनना और वहां की समस्याओं को सुलझाना बहुत कठिन हो सकता है. तो चलिए पाकिस्तान के वर्तमान हालत से रूबरू होते हैं.

पाकिस्तान का हाल

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत ही बेकार हो चुकी है, वहां की राजनीतिक हालात भी पूरी तरह से खराब है. जिसके कारण वहां की पढ़ाई-लिखाई लगातार बर्बाद होते नजर आ रही है. मगर पाक के आतंक को अधिक बढ़ावा मिलता दिखाई दे रहा है. इस स्थिति में पाकिस्तान में अब नई सरकार बन गई है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता और पाकिस्तान के पूर्व पीएम रहे शहबाज शरीफ ने एक बार फिर से पाकिस्तान में पीएम पद की जिम्मेदारी संभाली है. दरअसल उन्होंने पाक के 24वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया है. 

जानकारी दें कि, पाकिस्तान में बीते 8 फरवरी 2024 को आम चुनाव के लिए मतदान किया गया था. जिसमें सदन की कुल 265 सीटों के लिए चुनाव लड़ा गया था. जिसके बाद हाल ही में बीते 3 मार्च को पाकिस्तान में शहबाज शरीफ ने गठबंधन की सरकार बना ली. साथ ही पीएम पद की शपथ ली. जिसके बाद कई तरह के सवाल पैदा हो रहे हैं, जैसे क्या भारत देश को पाक से सावधान रहने की जरूरत है? 

कश्मीर की समस्या 

प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद ही शहबाज ने अपने पहले संबोधन में नेशनल असेंबली के अंदर कश्मीर के मुद्दे को उठाया है. जिसके कारण कश्मीर का विवाद एक बार फिर से गरमा गया है. पीएम ने बताया कि, “हम सबको एक होकर, नेशनल असेंबली में आजाद कश्मीर के लिए एक संकल्प लेना चाहिए”. इतना ही नहीं उन्होंने पड़ोसी देशों से रिश्ते मजबूत करने पर भी विचार विमर्श किया है. मगर क्या पीएम कश्मीर के मुद्दे को उठाकर भारत को चुनौती देना चाहते हैं? 

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