मिडिल ईस्ट जंग का असर भारत तक, सरकार का बड़ा फैसला-एलपीजी उत्पादन बढ़ा, उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने गैस आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव किया है। एलपीजी उत्पादन बढ़ाया गया है और घरेलू रसोई गैस को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। सरकार ने हालात को देखते हुए घरेलू गैस आवंटन में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत एलपीजी उत्पादन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि देश में एलपीजी का उत्पादन लगभग 10 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। सभी तेल रिफाइनरियां अभी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सरकार का मकसद यह है कि घरेलू रसोई गैस की सप्लाई पर कोई असर न पड़े। इसलिए गैस वितरण की पूरी व्यवस्था को फिर से संतुलित किया गया है।
सरकार ने अचानक उत्पादन बढ़ाने का फैसला क्यों लिया
दरअसल मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण गैस और तेल के वैश्विक रास्तों पर असर पड़ा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आने वाली एलएनजी आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। अगर यहां आपूर्ति बाधित होती है तो कई देशों की ऊर्जा व्यवस्था प्रभावित होती है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर घरेलू जरूरतों को सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है।
प्रधानमंत्री स्तर पर हालात की समीक्षा क्यों हुई
सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर उच्च स्तर की बैठक की। इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। बैठक में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। सरकार का कहना है कि अभी हालात नियंत्रण में हैं। लेकिन भविष्य के जोखिम को देखते हुए पहले से तैयारी जरूरी है। इसलिए ऊर्जा मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
उद्योगों की गैस आपूर्ति में कटौती क्यों की गई
नई व्यवस्था के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इसका मतलब है कि एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस को पहले गैस दी जाएगी। इन क्षेत्रों को उनकी पिछली औसत खपत के आधार पर पूरी गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद उर्वरक उद्योग को लगभग 70 प्रतिशत गैस मिलेगी। वहीं चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को लगभग 80 प्रतिशत गैस आपूर्ति की जाएगी। इस फैसले का मकसद यह है कि घरेलू जरूरतों पर कोई असर न पड़े।
क्या होने वाली है देश में एलपीजी की किल्लत
सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल एलपीजी की कोई कमी नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया पर फैल रही कई खबरें अफवाह हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि ऐसी बातों पर भरोसा न करें। देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं। ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए कई स्तरों पर निगरानी की जा रही है। सरकार का कहना है कि आम लोगों की रसोई गैस की जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित हैं।
गैस आपूर्ति का प्रबंधन अब कौन करेगा
सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति के प्रबंधन की जिम्मेदारी GAIL को दी है। इसका मकसद यह है कि प्राथमिक क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे। खास तौर पर घरेलू रसोई गैस और परिवहन क्षेत्र के लिए सीएनजी की सप्लाई को सुरक्षित रखा जाएगा। गैस वितरण की पूरी प्रक्रिया को अब ज्यादा व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाएगा। इससे ऊर्जा व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अगर संकट लंबा चला तो भारत क्या करेगा
अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबा खिंचता है तो भारत अन्य विकल्पों पर भी विचार करेगा। गैस की आपूर्ति के लिए नॉर्वे और अमेरिका जैसे देशों से एलएनजी आयात किया जा सकता है। हालांकि लंबी दूरी के कारण यह प्रक्रिया महंगी और जटिल हो सकती है। फिलहाल रूस से आने वाला तेल भारत के लिए कुछ राहत दे रहा है। लेकिन सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है ताकि ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर न पड़े।


