उत्तर कोरिया के निशाने पर पूरा अमेरिका, नॉर्थ कोरिया ने पेश किया अपना सबसे शक्तिशाली ह्वासॉन्ग-20 न्यूक्लियर मिसाइल
North Korea Missile Test : उत्तर कोरिया ने वर्कर्स पार्टी की 80वीं वर्षगांठ पर अपनी सबसे उन्नत परमाणु मिसाइल ह्वासॉन्ग-20 का अनावरण किया. यह सॉलिड-फ्यूल आधारित ICBM मिसाइल अमेरिका के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है. इसकी MIRV तकनीक एक साथ कई लक्ष्य भेदने में सक्षम है. किम जोंग उन ने इसे अब तक का सबसे शक्तिशाली परमाणु हथियार बताया. परेड में रूस और चीन की मौजूदगी से कूटनीतिक संदेश भी स्पष्ट हुआ.

North Korea Missile Test : उत्तर कोरिया ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य शक्ति का अहसास कराया है. 10 अक्टूबर को वर्कर्स पार्टी की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्योंगयांग में आयोजित भव्य सैन्य परेड में देश ने अपनी अब तक की सबसे ताकतवर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ह्वासॉन्ग-20 का अनावरण किया. इस परेड की खास बात यह रही कि इसमें रूस और चीन के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि भी मौजूद थे, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि उत्तर कोरिया अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ और नजदीक आ रहा है.
सॉलिड-फ्यूल से लैस है 'मॉन्स्टर मिसाइल'
एक मिसाइल, कई शहरों को तबाह करने की क्षमता
ह्वासॉन्ग-20 की दूसरी सबसे खतरनाक विशेषता है इसका MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) सिस्टम. इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल में कई परमाणु वॉरहेड्स लगे हो सकते हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकते हैं. यानी यदि यह मिसाइल लॉन्च की जाती है, तो यह एक ही समय में अमेरिका के कई शहरों को निशाना बना सकती है. इस प्रकार यह रणनीतिक रूप से न केवल सैन्य ठिकानों, बल्कि आर्थिक और जनसंख्या केंद्रों पर भी हमला करने की बेहद घातक क्षमता रखती है.
मोबाइल लॉन्चर से तैनाती, छिपाना आसान
ह्वासॉन्ग-20 को मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे इसे कहीं भी तैनात करना और दुश्मनों से छिपाना बेहद आसान हो जाता है. सॉलिड फ्यूल सिस्टम के कारण इसे बिना किसी लंबी तैयारी के तुरंत लॉन्च किया जा सकता है. यही कारण है कि यह मिसाइल किसी भी चेतावनी के बिना अचानक हमला करने की ताकत रखती है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद चिंताजनक है.
रूस और चीन के साथ गहराई से जुड़ रहा
इस सैन्य परेड का मकसद केवल अपनी तकनीकी ताकत दिखाना नहीं था, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर यह भी संदेश देना था कि उत्तर कोरिया अब रूस और चीन के साथ गहराई से जुड़ रहा है. परेड में रूस के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर और चीन के वाइस चेयरमैन की उपस्थिति इस ओर इशारा करती है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ बन रहे ध्रुवीकरण में उत्तर कोरिया भी पूरी ताकत से अपनी जगह बना रहा है. परेड में न केवल ह्वासॉन्ग-20 बल्कि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स भी प्रस्तुत किए गए, जो दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपनी तकनीक को लगातार विकसित कर रहा है.
अमेरिका और एशिया पर मंडराता खतरा
ह्वासॉन्ग-20 के सामने आने के बाद अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों जैसे जापान और दक्षिण कोरिया की चिंता और बढ़ गई है. अमेरिकी पेंटागन ने इसे एक "गंभीर रणनीतिक खतरा" बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के पास इस समय 50 से 60 परमाणु वॉरहेड्स हैं, और ये संख्या बढ़ती जा रही है. MIRV तकनीक और सॉलिड फ्यूल जैसे अत्याधुनिक सिस्टम के साथ यह मिसाइल किसी भी हमले को अंजाम देने के लिए तैयार है.
उत्तर कोरिया की इस नई मिसाइल के अनावरण ने न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. जब दुनिया पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और वैश्विक अस्थिरता से जूझ रही है, ऐसे समय में यह मिसाइल दुनिया को और असुरक्षित कर सकती है.


