पाकिस्तान की सीनेट से 27वां संविधान संशोधन मंजूर, बनाया गया CDF का पद...मुनीर को मिलेगी असीम पावर
पाकिस्तान की संसद ने 27वां संवैधानिक संशोधन पास किया, जिसके तहत “चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज” का नया सैन्य पद और एक नया संघीय संवैधानिक न्यायालय बनाया जाएगा. आर्मी चीफ को अधिक शक्तियां मिलेंगी और नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के प्रमुख की नियुक्ति भी आर्मी से होगी.

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने सोमवार को 27वें संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दे दी. यह संशोधन पिछले कई हफ्तों से राजनीतिक बहस और विवाद का विषय रहा. इस बिल के तहत पाकिस्तान में एक नया सैन्य पद “चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज” बनाया जाएगा और एक नया संवैधानिक न्यायालय भी स्थापित किया जाएगा.
कानून मंत्री आजम नजीर ने पेश किया था बिल
नए सैन्य पद और उनकी शक्तियां
संशोधन के अनुसार अब पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज की नियुक्ति करेंगे. वर्तमान ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद 27 नवंबर 2025 को समाप्त हो जाएगा. अब आर्मी चीफ आसिम मुनीर को अधिक अधिकार दिए जा रहे हैं. नए कानून के तहत आर्मी चीफ ही चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद संभालेगा और प्रधानमंत्री से सलाह लेकर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के प्रमुख की नियुक्ति करेगा, जो हमेशा आर्मी से होगा.
आजीवन विशेष सैन्य रैंक
संशोधन में सेना, वायु सेना और नौसेना के अधिकारियों को फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ द एयर फोर्स और एडमिरल ऑफ द फ्लीट जैसी रैंक देने का प्रावधान है. इनमें से फील्ड मार्शल का दर्जा आजीवन रहेगा, यानी यह उपाधि मिलने के बाद जीवनभर वैध होगी.
नया संवैधानिक न्यायालय
संशोधन में एक संघीय संवैधानिक न्यायालय बनाने का प्रावधान भी शामिल है. यह अदालत केवल संविधान से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट अब नागरिक और आपराधिक मामलों तक ही सीमित रहेगी.
विपक्ष का विरोध और आगे की प्रक्रिया
विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने बिल का कड़ा विरोध किया. उन्होंने सीनेट में प्रदर्शन किया और वॉकआउट कर दिया. अब यह संशोधन नेशनल असेंबली में पेश किया जाएगा, जहां कुल 336 सदस्य हैं. सरकार के पास पहले से 233 सांसदों का समर्थन है, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए 226 वोट चाहिए. इसे देखते हुए यह संशोधन नेशनल असेंबली में भी आसानी से पास हो जाएगा.
सरकार का कहना है कि यह संशोधन संविधान को मजबूत करेगा और देश की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाएगा. वहीं, विपक्ष का आरोप है कि इस कदम से सेना को अधिक ताकत मिलेगी और नागरिक शासन कमजोर होगा. यह संशोधन पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य संरचना में अहम बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है.


