'बहुत बुरी पसंद...' मलिकी की PM उम्मीदवारी पर ट्रंप ने इराक को दी कड़ी चेतावनी, कहा- अमेरिका इराक को कोई मदद नहीं देगा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईराक को चेतावनी दी है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी फिर से सत्ता में आए तो अमेरिका इराक को कोई मदद नहीं देगा.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इराक को कड़ी चेतावनी दी. 27 जनवरी को उन्होंने कहा कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी फिर से सत्ता में आए तो अमेरिका इराक को कोई मदद नहीं देगा. ट्रंप ने इसे इराक के लिए “बहुत बुरी पसंद” बताया.
ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया कि मलिकी की वापसी इराक के लिए गलत फैसला होगा. उन्होंने लिखा, “मैं सुन रहा हूं कि इराक महान देश नूरी अल-मलिकी को फिर प्रधानमंत्री बनाने की बहुत बुरी पसंद कर सकता है.” ट्रंप ने कहा कि मालिकी के पिछले कार्यकाल में इराक गरीबी और अराजकता में डूब गया था. ऐसा फिर नहीं होने देना चाहिए.
उन्होंने चेताया कि मालिकी की नीतियों और विचारधारा के कारण अमेरिका इराक की मदद बंद कर देगा. ट्रंप ने कहा, “अगर हम मदद नहीं करेंगे तो इराक के पास सफलता, समृद्धि या आजादी की कोई संभावना नहीं रहेगी.”
मलिकी की नामांकन
इराक की संसद में सबसे बड़ी शिया राजनीतिक गठबंधन, कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क ने शनिवार को मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया. मलिकी 2006 से 2014 तक इराक के प्रधानमंत्री रहे थे. उनके कार्यकाल में संप्रदायिक हिंसा बढ़ी और इस्लामिक स्टेट (ISIS) का उदय हुआ.
अमेरिका ने उनकी संप्रदायिक नीतियों को दोष दिया और 2014 में इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया. मलिकी के ईरान से करीबी रिश्ते भी अमेरिका को चिंता देते हैं. अमेरिका ईरान प्रभाव को इराक में कम करना चाहता है.
इराक पर अमेरिका का दबाव
अमेरिका इराक पर काफी प्रभाव रखता है. इराक की ज्यादातर तेल निर्यात कमाई न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में रखी जाती है. यह व्यवस्था 2003 के अमेरिकी हमले के बाद बनी. तेल बिक्री से इराक की सरकार की 90 प्रतिशत आय आती है.
बता दें, ट्रंप की यह टिप्पणी कुछ दिनों बाद आई जब विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इराक के मौजूदा प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी से फोन पर बात की और मलिकी पर चिंता जताई. अमेरिका इराकी नेताओं को पत्र भी भेजा जिसमें मलिकी के खिलाफ राय जाहिर की गई. ट्रंप की चेतावनी इराक की नई सरकार बनाने की प्रक्रिया में बड़ा हस्तक्षेप है. इराक में परंपरा से प्रधानमंत्री शिया मुस्लिम होता है. अब देखना है कि इराकी नेता इस दबाव पर क्या फैसला लेते हैं.


