गरुड़ पुराण के अनुसार यमलोक के चार द्वार, जानिए कौन से दरवाजे से जाती हैं पापी आत्माएं?

गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन किया गया है. मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक की यात्रा करती है और उसके कर्मों के अनुसार प्रवेश दिया जाता है. यमलोक के चार द्वार हैं – पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण. पूर्व, पश्चिम और उत्तर द्वार पुण्यात्माओं के लिए सुखद हैं, जबकि दक्षिण द्वार पापी आत्माओं को कष्ट और नरक का अनुभव कराता है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

जन्म और मृत्यु संसार के दो अटल सत्य हैं. जो व्यक्ति जन्म लेता है, उसे एक दिन इस संसार को छोड़ना ही होता है. मृत्यु केवल जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की अगली यात्रा की शुरुआत भी होती है. गरुड़ पुराण, जो 18 महापुराणों में से एक है, जीवन, मृत्यु और आत्मा की यात्रा के बारे में विस्तार से बताता है. इसमें बताया गया है कि मृत्यु के पश्चात आत्मा अपनी अगली यात्रा पर निकल जाती है. यह यात्रा यमलोक तक पहुँचने की होती है, जहां आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार न्याय और अनुभव प्राप्त होता है.

मरने के बाद आत्मा यमलोक की यात्रा करती है 

मृत्यु के बाद आत्मा को दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है और वह यमलोक की यात्रा शुरू करती है. इस यात्रा में आत्मा को अपने पिछले जन्मों के अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार अनुभव और फल मिलता है. यमलोक की यात्रा में ही नहीं, बल्कि वहाँ पहुँचने के बाद भी आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार ही प्रवेश और स्थितियां दी जाती हैं. गरुड़ पुराण में यमलोक के चार मुख्य द्वार बताए गए हैं, जिनसे आत्माओं का प्रवेश होता है. इन द्वारों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है.

यमलोक के चार मुख्य द्वार

पूर्व द्वार: यमलोक का पूर्व द्वार अत्यंत आकर्षक और रत्न जड़ित है. हीरे, मोती, नीलम और पुखराज जैसी मूल्यवान वस्तुओं से सज्जित यह द्वार योगी, ऋषि, सिद्ध और संबुद्ध आत्माओं के लिए खुलता है. इस द्वार से प्रवेश करने के बाद आत्माओं का स्वागत गंधर्व, देव और अप्सराएं करती हैं. इसे स्वर्ग का द्वार भी कहा गया है.

पश्चिम द्वार: पश्चिम द्वार भी रत्नों से सज्जित होता है. इस द्वार से उन आत्माओं का प्रवेश होता है, जिन्होंने अपने जीवन में अच्छे कर्म किए, दान-पुण्य किया और धर्म का पालन किया. यह द्वार कर्मों के आधार पर सुखद अनुभव प्रदान करता है.

उत्तर द्वार: उत्तर द्वार से माता-पिता की सेवा करने वाले, सत्य बोलने वाले, अहिंसा पालन करने वाले, जरूरतमंदों की सहायता करने वाले और धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों की आत्माओं को प्रवेश दिया जाता है. यह द्वार भी स्वर्णजड़ित रत्नों से सुसज्जित होता है और इसमें प्रवेश करने पर आत्माओं को शांति और सुख की अनुभूति होती है.

दक्षिण द्वार: दक्षिण द्वार सबसे भयानक और कष्टकारी माना जाता है. यह द्वार पापी आत्माओं के लिए खुलता है. जो व्यक्ति जीवन में धर्म-कर्म का पालन नहीं करता, अन्याय करता और पाप के मार्ग पर चलता है, उसकी आत्मा को इसी द्वार से गुजरना पड़ता है. इसे नरक का द्वार कहा गया है, और इस द्वार से गुजरने वाली आत्माओं को सौ वर्षों तक कष्ट भोगना पड़ता है.

द्वार आत्मा के कर्मों के महत्व को स्पष्ट करते हैं
गरुड़ पुराण में यमलोक के चार द्वार आत्मा के कर्मों के महत्व को स्पष्ट करते हैं. यह बताता है कि जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्म मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति और यात्रा को निर्धारित करते हैं. पूर्व, पश्चिम और उत्तर द्वार पुण्यात्माओं के लिए सुखद अनुभव और सम्मान प्रदान करते हैं, जबकि दक्षिण द्वार पापी आत्माओं के लिए कष्ट और नरक का मार्ग खोलता है. इस प्रकार, गरुड़ पुराण हमें जीवन में धर्म, सत्य और कर्मशीलता का पालन करने की सीख देता है, जिससे आत्मा को मोक्ष की ओर अग्रसर किया जा सके.

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