फेंक दो इसे...आखिर क्यों दुर्योधन के पैदा होते विदुर ने मारने का दिया था सुझाव, कलयुग से जुड़ा है रहस्य

Mahabharata: महाभारत की कहानियों में कई रहस्यमयी घटनाएं छिपी हुई हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब कौरवों के सबसे बड़े पुत्र दुर्योधन का जन्म हुआ, तो विदुर ने उसे तुरंत मार देने की सलाह दी थी? यह सुनकर शायद आपको झटका लगे, लेकिन इसके पीछे एक गहरा रहस्य छिपा है, जो कलयुग से जुड़ा हुआ है.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

Mahabharata: महाभारत की गाथा रहस्यों से भरी हुई है, लेकिन इसके सबसे बड़े खलनायक दुर्योधन के जन्म से जुड़ी घटनाएं चौंका देने वाली हैं. कहा जाता है कि जब वह पैदा हुआ, तो आकाश में भयानक गूंज उठी, गिद्ध और सियार चिल्लाने लगे, और धरती पर अशुभ संकेत दिखाई देने लगे. ज्योतिषियों ने धृतराष्ट्र को चेतावनी दी कि यह बालक विनाश का कारण बनेगा और इसे त्याग देना चाहिए. लेकिन पुत्रमोह में फंसे धृतराष्ट्र ने उनकी बात नहीं मानी.

हालांकि, आगे चलकर इसका परिणाम महाभारत के भयंकर युद्ध और कौरवों के सर्वनाश के रूप में सामने आया. तो आखिर दुर्योधन के जन्म के समय क्या हुआ था? क्यों विदुर ने इसे त्यागने की सलाह दी थी? आइए जानते हैं इस रहस्यमयी कथा को विस्तार से.

गर्भवती गांधारी और एक रहस्यमयी जन्म

महर्षि व्यास ने गांधारी को वरदान दिया था कि उनके 100 पुत्र होंगे, लेकिन जब दो वर्षों तक कोई संतान नहीं हुई, तो आशंका बढ़ने लगी. इसी दौरान कुंती ने युधिष्ठिर को जन्म दिया, जिससे गांधारी की (चिंता) और बढ़ गई. इस बीच, गांधारी ने गर्भपात कराया तो एक ठोस मांस का पिंड निकला, जिसे देखकर सभी दंग रह गए. वह इसे त्यागने जा ही रही थीं कि महर्षि व्यास वहां पहुंचे और कहा "मेरा कथन कभी गलत नहीं होता, इसे त्यागो मत."फिर उन्होंने उस मांस को शीतल जल में डलवाया, जिससे 101 भ्रूण अलग हुए, जिन्हें घी से भरे घड़ों में रखा गया. एक वर्ष बाद पहले घड़े से दुर्योधन जन्मा.

दुर्योधन के जन्म पर हुए भयानक अपशकुन

जैसे ही दुर्योधन ने जन्म लिया, अजीब घटनाएं होने लगी. दुर्योधन गधे की तरह कर्कश चीखने लगा.  गिद्ध, उल्लू, सियार और कौवे एक साथ चिल्लाने लगे.आकाश काला पड़ गया और जगह-जगह आग लग गई.पृथ्वी कंपन करने लगी और भयावह ध्वनियां सुनाई देने लगी. यह देखकर धृतराष्ट्र डर गए और उन्होंने तुरंत विदुर और भीष्म से पूछा, "क्या मेरा पुत्र राजा बनेगा? "धृतराष्ट्र के इतना पूछते ही फिर से भयंकर आवाजें गूंजने लगीं, जिससे सभी भयभीत हो गए.

ज्योतिषियों और ब्राह्मणों ने क्या चेतावनी दी?

ज्योतिषियों ने तुरंत पंचांग देखकर ग्रह-नक्षत्र की गणना की और घबराकर कहा, "यह बालक पूरे वंश के विनाश का कारण बनेगा. इसे त्याग दें, अन्यथा यह विनाश लेकर आएगा." उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दुर्योधन के कारण कुल में कलह फैलेगी. युद्ध और विध्वंस होगा.इसका अहंकार वंश का नाश करेगा. लेकिन धृतराष्ट्र पुत्रमोह में अंधे थे. उन्होंने अपने पुत्र को त्यागने से इनकार कर दिया.

क्या सच में दुर्योधन ‘कलयुग का प्रतीक’था?

शास्त्रों में कहा गया है कि दुर्योधन कलयुग का अवतार था, जिसमें, अहंकार और घमंड कूट-कूटकर भरा था. धोखा, कपट और छल करने में माहिर था. सत्य और धर्म का शत्रु था. इसलिए महाभारत में उसकी हार पहले से तय थी.

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