7 बार से सांसद, कुर्मी जाति से रखते हैं संबंध...कौन हैं यूपी में कमल का चौधरी बनने जा रहे पंकज?

केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनना तय है. वरिष्ठ नेतृत्व के समर्थन और निर्विरोध नामांकन के साथ उनकी ताजपोशी 2027 चुनावों से पहले ओबीसी समीकरण साधने और संगठन मजबूत करने की अहम रणनीति मानी जा रही है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

लखनऊः उत्तर प्रदेश की सियासत में एक अहम संगठनात्मक बदलाव होने जा रहा है. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नया प्रदेश अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है. रविवार को उनका निर्विरोध चयन लगभग सुनिश्चित है और औपचारिक घोषणा की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. पंकज चौधरी ने शनिवार को लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक मौजूद रहे.

शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने बढ़ाया राजनीतिक संदेश

नामांकन के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे. इनमें उत्तर प्रदेश भाजपा के निवर्तमान अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शामिल थीं. वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पंकज चौधरी को संगठन और केंद्रीय नेतृत्व का पूरा समर्थन प्राप्त है. चूंकि इस पद के लिए उनके अलावा किसी और नेता ने नामांकन नहीं किया, इसलिए उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है.

कार्यकर्ताओं के स्वागत से जताया आभार

नामांकन से पहले लखनऊ पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने पंकज चौधरी का गर्मजोशी से स्वागत किया. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि कार्यकर्ताओं के स्नेह और सम्मान ने उन्हें भावुक कर दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और वे संगठन की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे.

कौन हैं पंकज चौधरी?

पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश के महराजगंज लोकसभा क्षेत्र से सात बार सांसद रह चुके हैं. उनका राजनीतिक सफर लंबा और अनुभव से भरपूर रहा है. वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर से भी गहरे तौर पर जुड़े माने जाते हैं. पार्टी के भीतर उन्हें एक भरोसेमंद और जमीन से जुड़े नेता के रूप में देखा जाता है. माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी उन्हें विशेष विश्वास प्राप्त है.

कुर्मी समुदाय और चुनावी गणित

पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय से आते हैं, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल किया जाता है. उत्तर प्रदेश में यह समुदाय खासकर मध्य और पूर्वी हिस्सों में अच्छी संख्या में मौजूद है और इसका चुनावी प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है. हाल के वर्षों में कुर्मी वोट बैंक का झुकाव समाजवादी पार्टी की ओर देखा गया था. ऐसे में भाजपा की रणनीति है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इस समुदाय को फिर से अपने पाले में लाया जाए. पंकज चौधरी की ताजपोशी को अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है.

भाजपा में कुर्मी नेतृत्व की परंपरा

यह पहली बार नहीं है जब कुर्मी समुदाय से किसी नेता को उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी जा रही हो. इससे पहले स्वतंत्र देव सिंह, ओम प्रकाश सिंह और विनय कटियार भी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. इससे यह साफ होता है कि भाजपा संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले लेती रही है.

जमीनी नेता की छवि

स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के अनुसार पंकज चौधरी एक बेहद मेहनती और मिलनसार नेता हैं. वे आम लोगों से सीधे संवाद के लिए जाने जाते हैं. वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गोरखपुर दौरे के दौरान पंकज चौधरी के घर जाना भी काफी चर्चा में रहा था. पीएम मोदी ने उनके परिवार से मुलाकात की और उनकी मां के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी. इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर पंकज चौधरी उनसे मिलने दिल्ली आने वाले थे, तो उन्हें खुद गोरखपुर आकर मिलना चाहिए.

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