भाजपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर शिवसेना से महाराष्ट्र नगर निकाय का नियंत्रण छीना, निलंबन का सिलसिला शुरू
मुंबई के अंबरनाथ नगर निकाय की राजनीति में हुए अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया. पार्टी ने अंबरनाथ के सभी नगरसेवकों के साथ-साथ क्षेत्र के ब्लॉक अध्यक्ष को भी निलंबित कर दिया.

मुंबई के अंबरनाथ नगर निकाय की राजनीति में हुए अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने कड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने अंबरनाथ के सभी नगरसेवकों के साथ-साथ क्षेत्र के ब्लॉक अध्यक्ष को भी निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली अंबरनाथ विकास आघाड़ी से हाथ मिला लिया, जबकि इसकी जानकारी न तो प्रदेश नेतृत्व को दी गई और न ही पार्टी संगठन को.
पत्र में क्या कहा गया?
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने इस संबंध में अंबरनाथ कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को पत्र भेजा. पत्र में कहा गया कि कांग्रेस ने अपने चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं, लेकिन इसके बावजूद राज्य नेतृत्व को बताए बिना भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया गया, जिसकी सूचना पार्टी को मीडिया के माध्यम से मिली. पत्र में इसे अनुचित बताते हुए प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर प्रदीप पाटिल को पार्टी से निलंबित किए जाने की बात कही गई. इस फैसले से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस स्थानीय स्तर पर वैचारिक लाइन के खिलाफ किए गए गठबंधनों को लेकर सख्त रुख अपना रही है.
दूसरी ओर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस तरह के स्थानीय राजनीतिक गठजोड़ों पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने भाजपा नेताओं को निर्देश दिया है कि अकोला के अकोट में एआईएमआईएम और अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ किए गए गठबंधनों को तुरंत समाप्त किया जाए. फडणवीस ने साफ कहा कि कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ गठबंधन स्वीकार्य नहीं है.
गौरतलब है कि 20 दिसंबर को हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना 60 सदस्यीय परिषद में 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से चार सीटें पीछे रह गई. भाजपा को 14, कांग्रेस को 12, अजित पवार गुट की एनसीपी को चार सीटें मिलीं, जबकि दो निर्दलीय पार्षद चुने गए. बाद में भाजपा, कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी ने मिलकर अंबरनाथ विकास आघाड़ी बनाई और शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया.
शिवसेना को झटका
महापौर जैसे अधिकार रखने वाले नगराध्यक्ष पद के चुनाव में भी शिवसेना को झटका लगा, जहां उसकी उम्मीदवार को भाजपा समर्थित प्रत्याशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा. भाजपा नेताओं का कहना है कि शिवसेना के लंबे शासन में कथित भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति से नगर प्रशासन को मुक्त कराने के उद्देश्य से यह गठबंधन किया गया. हालांकि, इस अप्रत्याशित गठजोड़ ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, खासकर ऐसे समय में जब मुंबई और ठाणे जैसे बड़े शहरों में निकाय चुनाव नजदीक हैं.
शिवसेना ने इस गठबंधन को अवसरवादी और अनैतिक करार देते हुए तीखी आलोचना की है. वहीं कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि उसे इस गठबंधन का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला था, जबकि स्थानीय स्तर पर गठबंधन की घोषणा पहले ही हो चुकी थी.


