प्रमोद महाजन से लेकर अजित पवार तक...महाराष्ट्र में बीते दो दशकों में कई बड़े नेताओं का हुआ असमय निधन, राजनीति को लगा गहरा झटका
महाराष्ट्र की राजनीति को बड़ा झटका लगा जब उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार का विमान दुर्घटना में निधन हो गया. वे एक प्रभावशाली प्रशासक और राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र थे. उनकी मृत्यु से एनसीपी, गठबंधन राजनीति और महाराष्ट्र के सत्ता संतुलन पर गहरा असर पड़ने की संभावना है. यह घटना राज्य में अचानक हुई राजनीतिक क्षति की श्रृंखला में एक और अहम अध्याय जोड़ती है.

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति बुधवार को उस समय स्तब्ध रह गई जब उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता अजीत पवार का विमान बारामती के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मृत्यु हो गई. “अजीत दादा” के नाम से पहचाने जाने वाले पवार राज्य की राजनीति में एक निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे. उनका अचानक जाना न केवल उनके समर्थकों के लिए, बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है.
मजबूत शक्ति केंद्र के रूप में देखा जाता था
बीते दो दशकों में कई बड़े नेताओं का असमय निधन
अजीत पवार की मृत्यु महाराष्ट्र में उन अप्रत्याशित घटनाओं की याद दिलाती है, जिन्होंने समय-समय पर राजनीति की दिशा बदल दी. बीते दो दशकों में कई बड़े नेताओं का असमय निधन हुआ, जिससे न केवल पार्टियों को बल्कि पूरे राज्य को राजनीतिक रूप से नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इन घटनाओं ने यह साबित किया है कि एक मजबूत नेता का अचानक जाना सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है.
सबसे तेज-तर्रार नेताओं में गिने जाते थे प्रमोद महाजन
प्रमोद महाजन भाजपा के सबसे तेज-तर्रार और रणनीतिक नेताओं में गिने जाते थे. वे संगठनात्मक क्षमता और आधुनिक राजनीतिक सोच के लिए जाने जाते थे. 2006 में उनकी हत्या ने भाजपा को गहरे सदमे में डाल दिया. उनके बाद पार्टी को नेतृत्व और रणनीति दोनों स्तरों पर नए सिरे से खुद को ढालना पड़ा. महाजन का जाना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी, बल्कि भाजपा की उभरती राजनीतिक दिशा में बड़ा मोड़ साबित हुआ.
गोपीनाथ मुंडे को भाजपा का जननेता माना जाता था
गोपीनाथ मुंडे को महाराष्ट्र में भाजपा का जननेता माना जाता था. उन्होंने सामाजिक और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर राजनीति की और आम जनता से सीधा संवाद बनाया. 2014 में एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद पार्टी को राज्य में एक मजबूत और स्वीकार्य चेहरे की कमी महसूस हुई. मुंडे की राजनीति ने दिखाया कि जनसमर्थन के बिना सत्ता टिकाऊ नहीं होती.
विलासराव देशमुख के बाद कमजोर हुई कांग्रेस
कांग्रेस के लिए विलासराव देशमुख का निधन एक बड़ा झटका था. वे न केवल कुशल प्रशासक थे, बल्कि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को गहराई से समझते थे. उनके बाद कांग्रेस महाराष्ट्र में वैसी पकड़ दोबारा नहीं बना सकी. आज भी पार्टी उस स्तर के नेता की तलाश में है, जो विभिन्न गुटों और वर्गों को साथ लेकर चल सके.
अजीत पवार का राजनीतिक कद
अजीत पवार लगातार सात बार बारामती से विधायक चुने गए, जो उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है. सहकारी संस्थाओं, विशेषकर चीनी उद्योग और बैंकिंग क्षेत्र में उनका प्रभाव बहुत गहरा था. उन्होंने जल संसाधन, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया और एक सख्त, परिणामोन्मुख प्रशासक की छवि बनाई.
विवाद, साहस और निर्णायक फैसले
अजीत पवार अपने साहसी और कभी-कभी चौंकाने वाले राजनीतिक फैसलों के लिए जाने जाते थे. 2019 में भाजपा के साथ अचानक सरकार बनाने का कदम हो या 2023 में एनसीपी में विभाजन कर नई सरकार में शामिल होना—हर फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा दी. इन कदमों ने उन्हें एक प्रभावशाली, लेकिन विवादास्पद नेता भी बनाया.
देश भर से शोक संदेश आए
उनके निधन के बाद राज्य और देश भर से शोक संदेश आए. विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके प्रशासनिक कौशल, अनुशासन और कार्यशैली की सराहना की. कई नेताओं ने उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया जो पूरी तैयारी के साथ फैसले लेता था और राजनीति को केवल सत्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मानता था.
राजनीति में बना खालीपन
अजीत पवार का निधन महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है, जिसे भरना आसान नहीं होगा. आने वाले समय में राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टियाँ इस बदलते परिदृश्य में खुद को कैसे पुनर्गठित करती हैं. उनका योगदान लंबे समय तक राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना रहेगा.


