UP में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ किया था दुष्कर्म, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के एक गांव में छह साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में कोर्ट ने उसी गांव के आरोपी अमित रैकवार को फांसी की सजा के साथ ही अन्य धाराओं में सजा सहित 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अर्थदंड की धनराशि पीड़िता के क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

बांदा : उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में छह महीने पहले हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था. 25 जुलाई 2025 को एक छह वर्षीय बच्ची के साथ उसके पड़ोसी अमित रैकवार द्वारा हैवानियत की गई. पीड़िता उस समय अपने माता-पिता के खेत में मौजूद थी और घर पर अकेली थी. आरोपी ने उसे पैसे और गुटखा का लालच देकर अपने घर बुलाया. घर में बच्ची के साथ घिनौनी हरकत की गई, उसके नाजुक अंगों पर दांतों से चोट की गई और उसे मारने तक की कोशिश की गई. बच्ची को डराने और चुप कराने के लिए आरोपी ने उसे मारपीट की, जिससे बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई.

बड़ी बहन ने पिता को सूचित किया 

आपको बता दें कि बच्ची को आंगन में खून से लथपथ पाया गया, और उसकी बड़ी बहन ने तुरंत पिता को सूचना दी. परिवार ने तत्काल बच्ची को अस्पताल पहुँचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संज्ञेय अपराधों में मामला दर्ज किया और मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा.

अदालत ने 56 दिनों के अंदर सुनाई सजा 
विशेष न्यायाधीश पाक्सो और अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केवल 56 दिनों में फैसला सुनाया. अदालत ने आरोपी अमित रैकवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई. इसके अलावा अन्य धाराओं के तहत आरोपी पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जो पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाएगा. जुर्माना न भरने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा काटी जाएगी. अदालत ने अपने 46 पृष्ठीय फैसले में लिखा कि आरोपी ने जानबूझकर बच्ची के साथ अत्याचार किया और उसे मानसिक एवं शारीरिक दोनों प्रकार से प्रताड़ित किया.

समाज और कानून के लिए संदेश
यह घटना न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए त्रासदी रही, बल्कि समाज के लिए चेतावनी भी है कि बच्चों की सुरक्षा को कोई हल्के में नहीं ले सकता. न्यायालय ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करके यह संदेश दिया कि ऐसे घिनौने अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी. अदालत का निर्णय पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ समाज को यह भी याद दिलाता है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के प्रति कानून पूरी तरह गंभीर है. इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि कानूनी प्रक्रिया में तेजी और सख्ती बच्चों के प्रति अपराधों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

इस प्रकार, बांदा में हुई यह घटना और अदालत का न्यायिक फैसला समाज के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया, जो बच्चों की सुरक्षा, कानूनी कार्रवाई और दोषियों को कड़ी सजा देने की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है.

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