राजधानी में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम हुआ अनिवार्य, बढ़ते प्रदूषण की चिंता के बीच दिल्ली सरकार ने उठाया बड़ा कदम
दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण के चलते सरकार ने 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया है. AQI 460 पहुंचने पर GRAP-IV लागू हुआ. निर्माण कार्य रुके और प्रभावित मजदूरों को 10,000 रुपये की सहायता दी जाएगी.

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है. जहरीली होती हवा के बीच सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए सभी सरकारी और निजी संस्थानों को अपने 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने का निर्देश जारी किया है. सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि आदेशों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी. उद्देश्य साफ है. सड़कों पर भीड़ कम हो, वाहनों की आवाजाही घटे और प्रदूषण पर कुछ हद तक लगाम लगाई जा सके.
दिल्ली की हवा फिर ‘गंभीर’ स्तर पर
14 दिसंबर को इस सीजन की अब तक की सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई. शाम के समय राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 441 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, रात होते-होते हालात और बिगड़ गए और AQI 460 तक जा पहुंचा. यह स्तर न केवल बुजुर्गों और बच्चों के लिए, बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी बेहद खतरनाक माना जाता है.
CAQM ने लागू किया GRAP का चौथा चरण
लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बिना देरी किए प्रदूषण-रोधी उपायों के चौथे चरण (GRAP-IV) को लागू कर दिया है. इसके तहत राजधानी में निर्माण गतिविधियों पर सख्त रोक, डीजल वाहनों पर प्रतिबंध और गैर-जरूरी औद्योगिक गतिविधियों को सीमित करने जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं. सरकार को उम्मीद है कि इन उपायों से प्रदूषण के स्तर में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा.
वर्क फ्रॉम होम से घटेगा ट्रैफिक दबाव
सरकार का मानना है कि आधे कर्मचारियों के घर से काम करने से सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, जिससे वाहनों से निकलने वाला धुआं घटेगा. इसके साथ ही निजी और सरकारी दफ्तरों में भीड़ कम रहने से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाला सीधा असर भी कम किया जा सकेगा. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी विभाग और कंपनियां इस आदेश का सख्ती से पालन करें.
निर्माण श्रमिकों को राहत
प्रदूषण-रोधी प्रतिबंधों के चलते निर्माण कार्यों पर रोक लगने से हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है. इसे ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है. यह राशि उन मजदूरों को दी जाएगी जो फिलहाल काम न कर पाने के कारण आय से वंचित हो गए हैं. सरकार का कहना है कि यह सहायता अस्थायी राहत के तौर पर दी जा रही है ताकि श्रमिक इस कठिन समय में बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें.
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा प्रदूषण स्तर से सांस की बीमारियों, आंखों में जलन, सिरदर्द और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है. खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. लोगों से अपील की गई है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, घर से बाहर निकलने से बचें.
आगे भी जारी रह सकते हैं सख्त कदम
सरकार और पर्यावरण एजेंसियों का कहना है कि अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो और भी कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और प्रदूषण के स्तर को कम करना है. आने वाले दिनों में मौसम और हवा की दिशा पर भी हालात काफी हद तक निर्भर करेंगे.


