आवारा पशु को पालने पर मिलेंगे 12000 रुपये प्रति महीने, इस राज्य की सरकार ने बनाई दो स्कीम...जानिए क्या है योजनाएं
हम अक्सर अपने आस-पास आवारा पशुओं को देखते है, जो ईर्द गिर्द भटकते रहते है, लेकिन अब आप इन पशुओं को पालकर पैसा कमा सकते है. इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने दो स्कीमें बनाई है. जिसके तहत इन मवेशियों को पालने वाले को सरकार हर महीने 12 हजार रुपये देगी.

नई दिल्ली : उत्तराखंड सरकार ने आवारा पशुओं की समस्या से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए दो नई योजनाएं शुरू की हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य सड़कों और खेतों में घूम रहे निराश्रित मवेशियों को सुरक्षित आश्रय देना है, ताकि फसलों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके. इसके साथ ही सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आय का एक नया साधन भी तैयार किया है, जिसके तहत वे हर महीने 12 हजार रुपये तक कमा सकते हैं.
फसलों की सुरक्षा और पशु कल्याण पर फोकस
ग्राम गौर सेवक योजना से होगी सीधी कमाई
पहली योजना का नाम ‘ग्राम गौर सेवक योजना’ है. इसके तहत कोई भी ग्रामीण व्यक्ति अधिकतम पांच नर आवारा पशुओं को अपने पास रख सकता है. सरकार प्रत्येक पशु के लिए 80 रुपये प्रतिदिन की सहायता राशि देती है. इस हिसाब से पांच पशुओं को पालने वाले व्यक्ति को हर महीने करीब 12 हजार रुपये मिलेंगे. इसके साथ ही इन पशुओं की निशुल्क स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधा भी पशुपालन विभाग की ओर से दी जाएगी. फिलहाल पिथौरागढ़ जिले में छह लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं.
गौशाला योजना के तहत बड़े स्तर पर व्यवस्था
दूसरी योजना ‘गौशाला योजना’ के नाम से शुरू की गई है. इसमें कोई व्यक्ति या संस्था अपने गौसदन में किसी भी संख्या में निराश्रित पशुओं को रख सकती है. यहां भी सरकार प्रति पशु 80 रुपये के हिसाब से भुगतान करती है. इस योजना का उद्देश्य बड़े स्तर पर आवारा पशुओं को संगठित ढंग से आश्रय देना है. पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी और बारावे क्षेत्रों में इस समय दो गौशालाएं संचालित हो रही हैं, जहां कुल 225 निराश्रित पशुओं को भोजन और सुरक्षित आश्रय मिल रहा है.
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष योजना
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये दोनों योजनाएं केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागू की गई हैं. इससे न सिर्फ किसानों को फसलों की सुरक्षा मिलेगी, बल्कि गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे. सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं से आवारा पशुओं की समस्या काफी हद तक नियंत्रित होगी और ग्रामीण जीवन में संतुलन वापस लौटेगा.


