रात 9 बजे वर्क कॉल से कर्मचारी ने किया इनकार, फाउंडर का रिएक्शन हुआ वायरल

Gurugram founder's reaction: गुरुग्राम की लिटिल ऑड मार्केटर्स की फाउंडर कृतिका मरवाहा ने लिंक्डइन पोस्ट में स्वीकार किया कि 'फाउंडर-गिरी' के दबाव ने उन्हें अनजाने में कठोर बॉस बना दिया था.

Simran Sachdeva

Gurugram founder's reaction: गुरुग्राम स्थित लिटिल ऑड मार्केटर्स की फाउंडर कृतिका मरवाहा ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट साझा कर कॉर्पोरेट वर्क कल्चर पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है. कृतिका मरवाहा ने स्वीकार किया कि स्टार्टअप बनाने की निरंतर जद्दोजहद ने उन्हें उस तरह का बॉस बना दिया था, जैसा वो कभी नहीं बनना चाहती थीं.

उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि कैसे एक सहयोगी के 9 बजे रात की वर्क कॉल को ठुकराने पर उनका नजरिया बदल गया. उस सहयोगी ने घरेलू जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कॉल से इंकार किया था और यही कृतिका मरवाहा के लिए आत्मचिंतन का कारण बना.

देर रात कॉल से मिली सीख

कृतिका मरवाहा ने लिखा- आप इसमें जुड़ते हैं तो अपना सब कुछ झोंक देते हैं – वीकेंड, नींद, परिवार का समय, क्योंकि यह सपना आपका है. और धीरे-धीरे आप दूसरों से भी उसी तीव्रता से जलने की उम्मीद करने लगते हैं. उन्होंने बताया कि सहयोगी ने व्हाट्सएप पर मैसेज कर विनम्रता से कॉल लेने से मना किया. वजह यह थी कि उसे डिनर बनाना था, बेटे की परीक्षा की तैयारी में मदद करनी थी और साथ ही इंटरनेट कनेक्शन भी दिक्कत कर रहा था.

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'मैं उसकी हकीकत देखने में नाकाम रही'

कृतिका मरवाहा ने कहा कि मैं अपनी ही जल्दबाजी में इतनी उलझी हुई थी कि उसकी वास्तविकता देख ही नहीं पाई. उस संदेश ने मुझे एहसास कराया कि मैं वैसी इंसान बन रही थी, जिसके रूप में पहचाने जाने के लिए मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी– वह इंसान जो यह भूल जाता है कि लोग किराया, घर, स्कूल की फीस, नेटवर्क की दिक्कतें और ज़िंदगी की रोजमर्रा की भागदौड़ संभालते हुए भी मेहनत से काम पर हाजिर होते हैं.

विज्ञापन उद्योग की संस्कृति पर सवाल

अपने अनुभव को साझा करते हुए मरवाहा ने विज्ञापन उद्योग की संस्कृति की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यहां तेजी और डेडलाइन को ही उपलब्धि का पैमाना बना दिया गया है, जबकि संवेदनशीलता अक्सर पीछे छूट जाती है. मरवाहा ने अपनी पोस्ट को इस निष्कर्ष के साथ समाप्त किया कि एक टीम लीडर के रूप में यह समझना बेहद जरूरी है कि कोई कर्मचारी अपने जीवन का केवल एक हिस्सा ही संस्थापक के सपने को पूरा करने में लगाता है. 

लिंक्डइन पर मिली सराहना

मरवाहा की इस ईमानदारी और आत्मचिंतन सोशल मीडिया पर लोगों को खूब पसंद आई. कई प्रोफेशनल्स ने उनकी पोस्ट पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और उनकी सोच की सराहना की. एक यूजर ने लिखा- काश आपके जैसे और भी संस्थापक और नेता होते जो इन तथ्यों को पहचानते और पूरी ईमानदारी से अपनी टीम का समर्थन करते. 

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