3 दिनों में 300 कुत्तों की मौत! तेलंगाना में एनिमल लवर्स के शिकायत पर सरपंच-सचिव सहित 9 के खिलाफ FIR दर्ज

तेलंगाना के हनमकोंडा जिले में करीब 300 आवारा कुत्तों की क्रूर हत्या का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. आरोपियों ने कथित तौर पर जहर देकर इन मासूम कुत्तों को मार डाला. एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट्स के दबाव के बाद पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

हनमकोंडा: तेलंगाना के हनमकोंडा जिले से सामने आई एक भयावह घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में कथित तौर पर सैकड़ों आवारा कुत्तों को जहर देकर मार डाले जाने का आरोप लगा है. इस गंभीर मामले में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता से जुड़े कानूनों के तहत केस दर्ज किया है और जांच तेज कर दी गई है.

इस घटना को लेकर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है. एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट अदुलापुरम गौतम और फरजाना बेगम ने 9 जनवरी को श्यामपेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ. पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आरोप बेहद गंभीर प्रतीत हो रहे हैं.

तीन दिनों में 300 कुत्तों को जहर देने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 6 जनवरी से तीन दिनों के भीतर श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में करीब 300 आवारा कुत्तों को जहर देकर मार दिया गया. इसके बाद इन कुत्तों के शवों को गांवों के बाहरी इलाकों में फेंक दिया गया. इस पूरी घटना को बेहद अमानवीय और सुनियोजित करार दिया गया है.

सरपंच और पंचायत सचिवों पर गंभीर आरोप

एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट अदुलापुरम गौतम और फरजाना बेगम का दावा है कि इस पूरे कृत्य में गांवों के सरपंचों और ग्राम पंचायत सचिवों की भूमिका रही. शिकायत के अनुसार, सरपंचों और पंचायत सचिवों ने दो लोगों को पैसे देकर कुत्तों को जहर देने और उनके शवों को ठिकाने लगाने के लिए नियुक्त किया था.

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने शिकायत के आधार पर श्यामपेट थाने में नौ आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) के तहत मामला दर्ज किया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केस पशु क्रूरता से जुड़ा है और इसकी गहन जांच की जा रही है.

कैसे हुआ खुलासा?

जांच अधिकारियों के मुताबिक, फोन रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयान इस ओर इशारा करते हैं कि कुछ आरोपियों ने पुलिस में मामला दर्ज होने से पहले पशु अधिकार कार्यकर्ताओं से निजी बातचीत में कुत्तों की हत्या की बात स्वीकार की थी. इन साक्ष्यों को जांच में अहम माना जा रहा है.

मेनका गांधी के हस्तक्षेप से बढ़ी जांच की रफ्तार

यह मामला तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इसमें दखल दिया. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर स्थानीय पुलिस को सही तरीके से मामला दर्ज करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही उन्होंने पशुओं के अवशेषों का पोस्टमार्टम कराकर फोरेंसिक एविडेंस इकट्ठा करने पर भी जोर दिया, ताकि जांच को मजबूत किया जा सके.

पुलिस और पशु कल्याण संगठनों की प्रतिक्रिया

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत होता है और सभी आरोपों की बारीकी से जांच की जा रही है. उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होगी. वहीं, पशु कल्याण संगठनों ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए राज्य सरकार से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है.

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