'पैसे देकर फैलाया जा रहा डर', लापता मामलों पर दिल्ली पुलिस का बयान

दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया था. बच्चों और महिलाओं के अचानक गायब होने के दावों के बीच अब दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: दिल्ली में लोगों के अचानक लापता होने को लेकर उठे शोर के बीच अब दिल्ली पुलिस ने स्थिति साफ कर दी है. साल 2026 में बीते 36 दिनों के भीतर 2,884 लोगों के लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ाई, जिनमें से केवल 409 लोग ही बरामद हुए. राजधानी दिल्ली में यह घटनाएं 2026 के जनवरी से फरवरी के बीच सामने आई, जिनमें बच्चों और महिलाओं के मामलों को प्रमुखता से जोड़ा गया.

रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 1 जनवरी से 5 फरवरी के बीच 616 बच्चे और 1,372 महिलाएं लापता हुई. इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सोशल मीडिया और कुछ प्लेटफॉर्म्स पर यह संदेश फैलने लगा कि राजधानी में अचानक लापता लड़कियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, जिससे आम लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया.

दिल्ली पुलिस का बयान, पेड प्रमोशन का आरोप

अब इस मामले में नया मोड़ तब लिया जब दिल्ली पुलिस ने X पर एक पोस्ट शेयर किया. पुलिस ने कहा कि कुछ सुरागों का पीछा करने के बाद यह सामने आया है कि दिल्ली में लापता लड़कियों की संख्या बढ़ने को लेकर जो हाइप बनाया जा रहा है, वह पेड प्रमोशन के जरिए फैलाया गया. पुलिस के अनुसार, पैसे के लिए डर और घबराहट फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दिल्ली पुलिस ने साफ किया कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो झूठी या भ्रामक सूचनाओं के जरिए सामाजिक माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.

दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष और SOP का जिक्र

इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी ने स्पष्ट किया कि लापता व्यक्तियों, खासकर बच्चों को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक, दिल्ली में लापता मामलों की रिपोर्टिंग में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है. बल्कि जनवरी 2026 में पिछले सालों की समान अवधि की तुलना में ऐसे मामलों में कमी दर्ज की गई है.

पुलिस ने बताया कि लापता व्यक्ति की रिपोर्ट स्थानीय थाने, ऑनलाइन पोर्टल और ERSS-112 के जरिए दर्ज कराई जा सकती है. तय SOP के तहत तुरंत तलाश शुरू की जाती है और बच्चों के मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. सभी जिलों में डेडिकेटेड मिसिंग पर्सन स्क्वाड और क्राइम ब्रांच में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट सक्रिय रूप से काम कर रही हैं.
 

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag