शाम 7 से 9 बजे तक 33 गांवों में होगा सन्नाटा! मोबाइल-टीवी पर लगा बैन, जानें क्यों लिया गया ऐसा फैसला
कर्नाटक की एक अनोखी पहल ने पूरे देश का ध्यान खींचा है. यहां हर रोज 7 बजे से रात 9 बजे तक मोबाइल फोन और टेलीविजन बंद रखने का नियम लागू किया गया है.

नई दिल्ली: कर्नाटक के हावेरी जिले में छात्रों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए एक खास और अनोखी पहल शुरू की गई है. यहां हावेरी तालुका की सभी 33 ग्राम पंचायतों के गांवों में हर रोज शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक मोबाइल फोन और टेलीविजन बंद रखने का नियम लागू किया गया है. इस फैसले का मकसद बच्चों को शांत माहौल में पढ़ाई करने का मौका देना है, खासकर जब दसवीं (एसएसएलसी) की परीक्षाएं नजदीक हैं.
परीक्षा परिणाम सुधारने की कोशिश
दसवीं और अन्य कक्षाओं के छात्र आजकल मोबाइल और टीवी में ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ता है. हावेरी तालुका पंचायत ने इस समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया. अधिकारियों का मानना है कि इन दो घंटों में बच्चे बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के किताबों पर फोकस कर सकेंगे. इससे न सिर्फ व्यक्तिगत पढ़ाई बेहतर होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के एसएसएलसी परीक्षा परिणामों में भी सुधार आने की उम्मीद है.
ढोल बजाकर की जाती है घोषणा
इस नियम को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए पुराने और पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल किया जा रहा है. हर ग्राम पंचायत के विकास अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे ढोल बजाकर सार्वजनिक रूप से घोषणा करें. शाम को ढोल की आवाज सुनते ही लोग समझ जाते हैं कि अब पढ़ाई का समय है. यह तरीका सुनिश्चित करता है कि गांव के हर घर तक संदेश पहुंचे, चाहे इंटरनेट हो या न हो.
बच्चों और परिवार के लिए फायदेमंद
यह पहल सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है. दो घंटे स्क्रीन से दूर रहने से परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत बढ़ती है. बच्चे माता-पिता से मदद ले सकते हैं, साथ में समय बिता सकते हैं. कई गांवों में लोग इस बदलाव से खुश हैं क्योंकि इससे घर में शांति और जुड़ाव बढ़ा है.
कर्नाटक सरकार और स्थानीय प्रशासन इस मुहिम को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. अगर यह प्रयोग अच्छे नतीजे देता है, तो अन्य इलाकों में भी इसे अपनाया जा सकता है. यह छोटा लेकिन प्रभावी कदम दिखाता है कि गांव स्तर पर भी शिक्षा को मजबूत करने के लिए सरल उपाय कितने कारगर हो सकते हैं.


