हाई-टेक सुविधाओं से लैस ‘सेवा तीर्थ’... आज PM मोदी करेंगे अपने नए ऑफिस का उद्घाटन, जानिए क्या है खास

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का उद्घाटन करेंगे. करीब ₹1,189 करोड़ की लागत से बने इस आधुनिक परिसर में पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद अब एक ही स्थान पर काम करेंगे.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली में आज शासन व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. प्रधानमंत्री कार्यालय अब ब्रिटिश कालीन साउथ ब्लॉक से निकलकर नए और आधुनिक परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नए भवन परिसर का उद्घाटन करेंगे. इसे प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुव्यवस्थित, तेज और डिजिटल बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर करीब 1:30 बजे सेवा तीर्थ भवन परिसर का नामकरण करेंगे. इसके बाद सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 तथा 2 का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा. शाम लगभग 6 बजे प्रधानमंत्री इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह बदलाव शासन प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

क्या है सेवा तीर्थ की खासियत?

सेवा तीर्थ परिसर दारा शिकोह रोड पर करीब 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है. इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1,189 करोड़ रुपये बताई गई है. यहां प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एक ही परिसर में स्थान दिया गया है. पहले ये सभी अलग-अलग भवनों में कार्यरत थे.

परिसर में तीन मुख्य इमारतें हैं—

सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय का मुख्यालय
सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय
सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय

यह पूरा परिसर ‘स्मार्ट ऑफिस’ के रूप में तैयार किया गया है. यहां हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम, पेपरलेस कार्य प्रणाली और अत्याधुनिक बैठक कक्ष जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

कर्तव्य भवन और हरित तकनीक

कर्तव्य भवन-1 और 2 में कानून, रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि सहित कई अहम मंत्रालयों के दफ्तर स्थापित किए गए हैं. इन भवनों को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है ताकि विभागों के बीच तालमेल बेहतर हो सके. परिसर को 4-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है. इसमें ऊर्जा बचत प्रणाली, जल संरक्षण उपाय और कचरा प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था शामिल है. सुरक्षा के लिए स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल और निगरानी नेटवर्क भी लगाए गए हैं.

साउथ ब्लॉक का ऐतिहासिक महत्व

ब्रिटिश काल में बना साउथ ब्लॉक लंबे समय तक देश के प्रशासनिक केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है. पहली कैबिनेट बैठक 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में यहीं हुई थी. अब 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां अंतिम कैबिनेट बैठक आयोजित की गई है. आगे चलकर साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को संग्रहालय में बदलने की योजना है. नॉर्थ ब्लॉक में ‘युगे युगीन संग्रहालय’ के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

13 फरवरी की तारीख क्यों है खास?

संयोग से 13 फरवरी 1931 को अंग्रेजों ने नई दिल्ली को औपनिवेशिक भारत की राजधानी घोषित किया था. अब ठीक उसी तारीख को प्रधानमंत्री कार्यालय का नए भवन में स्थानांतरण हो रहा है. इसे औपनिवेशिक ढांचे से आगे बढ़कर नए भारत के निर्माण की दिशा में प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है. सेवा तीर्थ का उद्घाटन केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक और भविष्य के अनुरूप बनाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है.

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