प्रत्यर्पण के बाद मेहुल चौकसी को जेल में कैसे रखा जाएगा? भारत सरकार ने बेल्जियम को दिया जवाब

भारत सरकार ने बेल्जियम को आश्वासन दिया कि मेहुल चोकसी को प्रत्यर्पण के बाद मानवीय और कानूनी अधिकारों के तहत सुरक्षित हिरासत मिलेगी. यह कदम PNB घोटाले और बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच को मजबूती देगा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएगा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

ह मंत्रालय ने बेल्जियम साम्राज्य के न्याय मंत्रालय और वहां की न्यायिक प्राधिकारियों को एक औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें उन शर्तों और प्रावधानों का उल्लेख किया गया है जिनके तहत बैंक धोखाधड़ी मामले में वांछित कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत लाए जाने पर हिरासत में रखा जाएगा. यह कदम प्रत्यर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है.

मानवाधिकारों की चिंता दूर करने की कोशिश

इस पत्र में विशेष रूप से मानवाधिकार संबंधी सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया है. गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार और जेल प्रशासन से चर्चा के बाद उन आश्वासनों को अंतिम रूप दिया है. इसमें चोकसी को मिलने वाले आवासीय प्रावधान, चिकित्सा सुविधाएँ, और न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता जैसे पहलुओं को स्पष्ट किया गया है.

सीबीआई के मामले में प्रत्यर्पण की मांग

भारत सरकार ने यह आश्वासन बेल्जियम अधिकारियों को उस प्रत्यर्पण अनुरोध के संदर्भ में दिया है, जो केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर मामले में किया गया है. चोकसी पर भारतीय कानून के कई गंभीर प्रावधानों के तहत आरोप लगे हैं, जिनमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 477ए (लेखा-जोखा में हेरफेर) और धारा 201 (सबूत मिटाने का अपराध) शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (POCA), 1988 की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा रही है.

बैंक धोखाधड़ी से जुड़े आरोप

मेहुल चोकसी पर हजारों करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है. वह पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले का मुख्य आरोपी माने जाते हैं, जिसने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को हिला कर रख दिया था. चोकसी लंबे समय से भारत से बाहर रहकर प्रत्यर्पण से बचने की कोशिश करता रहा है.

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में कदम

भारत सरकार की ओर से बेल्जियम को भेजे गए ये आश्वासन केवल औपचारिकता भर नहीं हैं, बल्कि प्रत्यर्पण संधियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चोकसी को भारत लाने के बाद उसके साथ किसी तरह का भेदभाव या अमानवीय व्यवहार न हो. इससे बेल्जियम अदालतों और न्यायिक अधिकारियों के सामने भारत की स्थिति और मजबूत हो सकेगी.

कानूनी प्रक्रिया में तेजी की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि इन आश्वासनों के बाद बेल्जियम सरकार और अदालतें भारत के अनुरोध को सकारात्मक दृष्टिकोण से देख सकती हैं. इससे चोकसी का प्रत्यर्पण संभव हो पाएगा और भारत में लंबित मुकदमों की सुनवाई आगे बढ़ सकेगी.

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