महाराष्ट्र: परभणी में मुस्लिम महापौर बनाने को लेकर सियासी संग्राम, भाजपा ने उद्धव पर साधा निशाना
परभणी नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के गठबंधन ने बहुमत के साथ सैयद इकबाल को महापौर चुना. भाजपा ने इसे हिंदुत्व से समझौता बताया, जबकि यूबीटी ने दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए फैसले का बचाव किया.

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दिलचस्प मोड़ आया है. जहां चंद्रपुर में महापौर पद को लेकर शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस आमने-सामने नजर आईं, वहीं परभणी में दोनों दलों ने एकजुट होकर सत्ता संभाली. यहां शिवसेना (यूबीटी) के पार्षद सैयद इकबाल को महापौर चुना गया, जिसके बाद भाजपा ने उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व से दूर जाने का आरोप लगाया है.
परभणी नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) 25 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं. चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच गठबंधन हुआ था, जिसके चलते वे कुल 37 सीटें हासिल करने में सफल रहे. 65 सदस्यीय नगर निकाय में यह साधारण बहुमत के लिए पर्याप्त था. इसी बहुमत के आधार पर सैयद इकबाल ने भाजपा उम्मीदवार तिरुमल खिलारे को 12 वोटों से हराकर महापौर पद हासिल किया. कांग्रेस को उप महापौर पद मिला, जिस पर गणेश देशमुख चुने गए.
चंद्रपुर विवाद के बाद भी साथ
चंद्रपुर में हुए महापौर चुनाव के बाद दोनों दलों के रिश्तों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी. वहां भाजपा को समर्थन देने के फैसले पर नेताओं के बीच बयानबाजी भी हुई. हालांकि, बाद में मतभेद सुलझा लिए गए और महा विकास अघाड़ी के सहयोगी दल परभणी में एकजुट रहे.
परभणी लंबे समय तक अविभाजित शिवसेना का मजबूत गढ़ रहा है. 2022 में पार्टी में विभाजन के बाद भी शिवसेना (यूबीटी) के संजय जाधव ने 2024 लोकसभा चुनाव में अपनी सीट बचाए रखी. एक समय शिवसेना हिंदुत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ती रही और खास नारों के जरिए प्रचार करती थी. लेकिन पार्टी में टूट और एमवीए के गठन के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. इस बार शिवसेना (यूबीटी) के 13 मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत को देखते हुए पार्टी ने मुस्लिम समुदाय से आने वाले पार्षद को महापौर बनाने का फैसला किया.
भाजपा ने लगाए आरोप
भाजपा ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. पार्टी प्रवक्ता नवनाथ बान ने कहा कि ठाकरे के पास मराठी हिंदू महापौर चुनने का मौका था, लेकिन उन्होंने मुस्लिम उम्मीदवार को चुनकर अलग संदेश दिया है. इस पर शिवसेना (यूबीटी) नेताओं ने जवाब दिया कि यह फैसला समर्थन और बहुमत के आधार पर लिया गया है. उन्होंने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा भी कई जगह मुस्लिम पार्षदों के समर्थन से सत्ता में आई है.
सांसद संजय राउत ने कहा कि मुस्लिम महापौर चुनना गलत कैसे हो सकता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि एपीजे अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति रहे हैं और ए आर अंतुले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए उन्होंने गठबंधन धर्म निभाया. वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाकरे पर राजनीति बदलने का आरोप लगाया.


