ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में बड़ा बदलाव: उल्लंघन पर लगेंगे पेनल्टी पॉइंट, इंश्योरेंस प्रीमियम से होगा लिंक
सरकार अब सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर गंभीर हो गई है. जल्द ही व्यवहार-आधारित पॉइंट सिस्टम लागू होगा, जिसमें आपकी ड्राइविंग की सारी हरकतें सीधे जुड़ेंगी. अच्छा चलाना- बोनस पॉइंट्स, गलत हरकत- पॉइंट कटौती.

नई दिल्ली: ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन से जुड़ी सेवाओं में केंद्र सरकार बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है. प्रस्तावित बदलावों के तहत 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस के नया रूप देना के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने की बाध्यता से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े पेनल्टी पॉइंट्स का प्रावधान लाने पर भी विचार किया जा रहा है.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इन सुधारों का उद्देश्य ease of living को बढ़ाना और अनावश्यक प्रक्रियात्मक अड़चनों को कम करना है. ड्राइविंग व्यवहार पर आधारित निगरानी व्यवस्था के जरिए न केवल सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है.
40–60 उम्र वालो को मेडिकल सर्टिफिकेट से राहत
वर्तमान व्यवस्था में 40 से 60 वर्ष की आयु के आवेदकों को नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या नवीनीकरण के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना अनिवार्य है. प्रस्तावित बदलाव के तहत इस आयु वर्ग के लिए यह शर्त हटाई जा सकती है, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए मेडिकल प्रमाणपत्र की अनिवार्यता बनी रहेगी. एक अधिकारी ने कहा कि 40 से 60 वर्ष की आयु के आवेदकों के लिए आयु-आधारित फिटनेस प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को समाप्त किया जा रहा है. व्यवहार में, इस प्रमाण पत्र को महज एक औपचारिकता माना जाता है और अधिकारियों द्वारा इसका सत्यापन शायद ही कभी किया जाता है, इसलिए इसे हटाने से अनावश्यक कागजी कार्रवाई कम हो जाएगी.
ट्रैफिक उल्लंघन पर प्वाइंट सिस्टम लागू करने की तैयारी
सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ड्राइवर के व्यवहार से जुड़ा प्वाइंट-आधारित सिस्टम तैयार कर रही है. अधिकारियों के अनुसार, ई-चालान के जरिए दर्ज किए गए ट्रैफिक उल्लंघनों पर ड्राइविंग लाइसेंस में पेनल्टी पॉइंट्स जुड़ेंगे. तय सीमा से अधिक पॉइंट्स जमा होने पर लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित हो सकता है या ड्राइविंग अधिकारों पर रोक लग सकती है.
बीमा प्रीमियम से जुड़ सकते हैं पेनल्टी पॉइंट्स
प्रस्तावों में यह भी शामिल है कि ड्राइविंग व्यवहार के आधार पर मोटर बीमा प्रीमियम को जोड़ा जाए. बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों को अधिक बीमा प्रीमियम देना पड़ सकता है, जिससे सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहन मिलेगा.
लाइसेंस प्रक्रिया होगी अधिक डिजिटल
ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने पर भी काम चल रहा है. सरकार का फोकस टेस्ट और मंजूरी में होने वाली देरी को कम करने और आकलन प्रक्रिया में तकनीक के अधिक उपयोग पर है, ताकि केवल योग्य चालकों को ही लाइसेंस जारी हो.
मोबाइल नंबर और पता अपडेट करना होगा अनिवार्य
अधिकारियों के मुताबिक, सभी ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के लिए मोबाइल नंबर और आवासीय पता डिजिटल रूप से अपडेट करना अनिवार्य किया जा सकता है. इससे परिवहन विभाग का डेटा अद्यतन रहेगा, चालकों से संपर्क आसान होगा और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन प्रणालियों को मजबूती मिलेगी.
वाहन के सारे काम पूरी तरह ऑनलाइन करने की योजना
एक अन्य बड़े सुधार के तहत वाहन स्वामित्व के ट्रांसफर की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का प्रस्ताव है. आधार आधारित प्रमाणीकरण के जरिए खरीदार और विक्रेता की पहचान सत्यापित की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि इससे परिवहन कार्यालयों में लंबी कतारें कम होंगी, कागजी कार्रवाई घटेगी और फर्जी ट्रांसफर पर रोक लगेगी.
मार्च से लागू हो सकते हैं कुछ सुधार
इन सुधारों पर 7 और 8 जनवरी को हुई दो दिवसीय मीटिंग में राज्य परिवहन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की गई थी. अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कुछ बदलाव मार्च तक लागू किए जा सकते हैं.
विशेषज्ञों की राय
दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त और एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट के फैकल्टी के अनुसार यह सकारात्मक कदम बताया. इससे अपराधियों पर प्रभावी ढंग से लगाम लगेगी. लेकिन 40 वर्ष से अधिक आयु के आवेदकों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र को समाप्त करने के बजाय, ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने और नवीनीकरण के लिए शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के मूल्यांकन में कठोर मानक होने चाहिए.


