ईरान जंग की आग में किसने सेकी सबसे बड़ी रोटी, यूरोपीय संघ का दावा-इस देश को मिला असली फायदा

​​​मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात पर यूरोपीय संघ ने बड़ा बयान दिया है। ईयू अध्यक्ष का कहना है कि इस टकराव से सबसे ज्यादा फायदा रूस को मिला है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को लेकर अब यूरोप से एक बड़ा बयान सामने आया है। यूरोपीय संघ के परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा है कि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते टकराव से असली फायदा किसी और को मिला है। उनका कहना है कि इस पूरे हालात में रूस आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है। कोस्टा ने ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के राजदूतों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उनके मुताबिक युद्ध और तनाव का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। और इसी वजह से रूस को अप्रत्यक्ष फायदा मिला है।

तेल की कीमतें क्यों तेजी से बढ़ीं

ईरान से जुड़े तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं। यही इस बार भी हुआ है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जवाबी कार्रवाइयों से वैश्विक तेल बाजार में तेजी आई। इसका फायदा सीधे रूस को मिला। क्योंकि रूस दुनिया के बड़े तेल और गैस निर्यातकों में शामिल है। तेल महंगा हुआ तो रूस की कमाई भी बढ़ गई। यूरोपीय संघ का कहना है कि इसी पैसे से रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक सहारा मिला है।

रूस को यूक्रेन युद्ध में कैसे मिली मदद 

यूरोपीय संघ के मुताबिक ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने रूस को अतिरिक्त संसाधन दिए हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में कर रहा है। यानी मिडिल ईस्ट का तनाव यूरोप के लिए नई चिंता बन गया है। क्योंकि इससे यूक्रेन युद्ध पर भी असर पड़ा है। यूरोप लंबे समय से रूस की आर्थिक ताकत को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन तेल की ऊंची कीमतों ने उस रणनीति को कमजोर कर दिया है। यही वजह है कि यूरोपीय नेताओं की चिंता अब और बढ़ गई है।

क्या यूक्रेन की स्थिति कमजोर हुई

कोस्टा ने कहा कि मिडिल ईस्ट की ओर सैन्य और राजनीतिक ध्यान जाने से यूक्रेन की स्थिति और कमजोर हुई है। दुनिया की बड़ी ताकतें अब ईरान और मिडिल ईस्ट पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसका असर यूक्रेन को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद पर भी पड़ा है। रूस के खिलाफ दबाव कम हुआ है। यूरोपीय संघ का मानना है कि यह स्थिति रूस के लिए अनुकूल है। क्योंकि जब ध्यान बंटता है तो युद्ध के मैदान में संतुलन बदल जाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना चिंता

मिडिल ईस्ट के तनाव का असर समुद्री रास्तों पर भी दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। लेकिन तनाव बढ़ने से इस इलाके में गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा और परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ा है। कई देशों को आपूर्ति को लेकर चिंता होने लगी है। इसी वजह से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।

### ट्रंप के बयान से क्या संकेत मिले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया। लेकिन यह बयान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत के बाद आया। पश्चिमी देश लंबे समय से रूस की तेल आय को सीमित करना चाहते हैं। ताकि यूक्रेन युद्ध को कमजोर किया जा सके। लेकिन हालात अभी उलटे नजर आ रहे हैं।

### क्या दुनिया नए भू राजनीतिक दौर में है

यूरोपीय संघ का कहना है कि दुनिया एक नए भू राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुकी है। कोस्टा ने कहा कि रूस यूक्रेन में शांति का उल्लंघन कर रहा है। चीन व्यापारिक नियमों को चुनौती दे रहा है। वहीं अमेरिका भी कई बार वैश्विक व्यवस्था को नए तरीके से परिभाषित करना चाहता है। इन सबके बीच मिडिल ईस्ट का तनाव नई जटिलताएं पैदा कर रहा है। यूरोपीय संघ का कहना है कि हालात को और बिगड़ने से रोकना जरूरी है। वरना इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

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