इजरायल ने ऑपरेशन 'राइजिंग लायन' के बाद जारी की हमले की तस्वीर, ईरान में नजर आई भयानक तबाही

इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान में गुप्त ड्रोन बेस से मिसाइल लॉन्च कर उसकी वायु सुरक्षा और परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचाया. हमले के बाद ईरान ने इसे युद्ध की घोषणा बताया और जवाबी हमलों की चेतावनी दी. अमेरिका ने समर्थन जताया, जिससे इज़रायल-ईरान तनाव बढ़ गया और मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका गहराई.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

इज़रायल के अधिकारियों के अनुसार, मोसाद ने ईरान के भीतर गुप्त रूप से एक ड्रोन बेस स्थापित किया था, जिससे सुबह के सटीक हमलों को सुविधाजनक बनाया गया. इस छिपे हुए बेस से लॉन्च किए गए विस्फोटकों से लदे ड्रोन ने तेहरान के पास बैलिस्टिक मिसाइल लांचरों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया, जिससे इज़रायली हवाई हमलों के शुरू होने पर ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता बाधित हुई. 

रिपोर्ट के अनुसार, उन्नत हथियार प्रणालियों को ले जाने वाले वाहनों को भी देश में तस्करी कर लाया गया. इन प्रणालियों को ईरान के हवाई रक्षा ग्रिड को बेअसर करने के लिए तैनात किया गया था, जिससे इजरायली लड़ाकू विमानों को ईरानी आसमान में महत्वपूर्ण हवाई श्रेष्ठता और परिचालन स्वतंत्रता मिली. 

हमले का प्रभाव 

इज़रायल के हमले में ईरान के परमाणु संयंत्र को क्षति पहुंची है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उम्मीद जताई कि ये हमले ईरान के धर्मतंत्र के पतन को गति देंगे. उन्होंने कहा कि ईरानी लोगों के लिए उनका संदेश यह है कि लड़ाई उनके साथ नहीं है, बल्कि "क्रूर तानाशाही के साथ है जिसने 46 वर्षों तक आप पर अत्याचार किया है." 

अमेरिका के पास दुनिया के सबसे घातक हथियार- ट्रंप

ईरान ने इसे 'युद्ध की घोषणा' मानते हुए इज़राइल को 'कठोर और निर्णायक' जवाब देने की धमकी दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अमेरिका दुनिया में सबसे घातक हथियार बनाता है और इज़राइल के पास भी उनमें से बहुत सारे हैं और वे उनका उपयोग करना भी जानते हैं. 

इजरायल-ईरान के बीच बढ़ा तनाव

इस हमले के बाद,क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है और वैश्विक समुदाय ने चिंता व्यक्त की है. ईरान ने 100 से अधिक ड्रोन इज़राइल की ओर लॉन्च किए, जिनमें से अधिकांश को इंटरसेप्ट किया गया. अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बढ़ने के बाद, ईरान ने आगामी वार्ता को रद्द कर दिया है. 

इस ऑपरेशन ने इज़रायल और ईरान के बीच शत्रुता के एक नए अध्याय की शुरुआत की है, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. वैश्विक नेताओं ने संयम की अपील की है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता की चिंता बनी हुई है.

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