‘नो फर्स्ट यूज’ से क्यों भागता है पाकिस्तान? PAK पत्रकार ने खोला परमाणु नीति का राज
पाकिस्तानी विश्लेषक नजम सेठी ने कहा कि भारत से पारंपरिक युद्ध में कमजोर होने के कारण पाकिस्तान ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति नहीं अपनाता. उन्होंने परमाणु हथियार को केवल भारत के खिलाफ रक्षात्मक हथियार बताया.

पाकिस्तान: परमाणु हथियारों को लेकर एक अहम सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि पाकिस्तान कभी भी ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले परमाणु हथियार न इस्तेमाल करने) की नीति पर सहमति क्यों नहीं देता. अब इस सवाल पर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी ने खुलकर अपनी बात रखी है.
एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में नजम सेठी ने साफ कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ पारंपरिक युद्ध में खुद को कमजोर मानता है. इसी वजह से वह परमाणु हथियारों को अंतिम सुरक्षा कवच के तौर पर देखता है और किसी भी हाल में पहले इस्तेमाल न करने का वादा नहीं करना चाहता.
'हम पारंपरिक जंग में भारत को नहीं रोक सकते'
नजम सेठी ने स्वीकार किया कि भारत के मुकाबले पाकिस्तान सैन्य ताकत, संसाधनों और रणनीति में पीछे है. उनके अनुसार, अगर केवल पारंपरिक हथियारों से युद्ध हुआ तो पाकिस्तान ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएगा. इसी डर की वजह से पाकिस्तान अपनी परमाणु नीति को लचीला रखना चाहता है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ‘नो फर्स्ट यूज’ पर हस्ताक्षर कर देता है, तो संकट की स्थिति में उसके पास कोई मजबूत विकल्प नहीं बचेगा. इसलिए परमाणु हथियारों को इस्तेमाल करने का अधिकार पाकिस्तान अपने पास रखना चाहता है.
'यह इस्लामिक नहीं, एंटी-इंडिया बम है'
नजम सेठी के बयान का सबसे विवादित हिस्सा यह रहा कि उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु हथियार को 'एंटी-इंडिया बम' बताया. उनका कहना था कि यह हथियार न तो किसी धार्मिक उद्देश्य के लिए है और न ही इसे किसी अन्य देश के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान न तो अमेरिका पर परमाणु हमला करेगा और न ही इजरायल पर. यह हथियार सिर्फ भारत से आने वाले खतरे को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है और इसे पूरी तरह रक्षात्मक माना जाता है.
अंतरराष्ट्रीय दबाव और पाकिस्तान की दुविधा
नजम सेठी ने यह भी माना कि पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार दबाव बना रहता है. दुनिया के कई देशों को यह चिंता रहती है कि पाकिस्तान कभी न कभी परमाणु हथियार या उसकी तकनीक किसी अन्य देश को दे सकता है, खासकर ऐसे इस्लामिक देशों को जिनके पास बहुत ज्यादा धन है. इसी वजह से पाकिस्तान को हमेशा शक की नजर से देखा जाता है और उस पर राजनीतिक व कूटनीतिक दबाव बना रहता है. इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी परमाणु नीति में बदलाव करने को तैयार नहीं है.
भारत ही है पाकिस्तान की एकमात्र चिंता
नजम सेठी के मुताबिक पाकिस्तान को किसी और देश से कोई सीधा खतरा नहीं है. उसकी पूरी सुरक्षा रणनीति भारत के इर्द-गिर्द घूमती है. परमाणु हथियारों को वह अपने अस्तित्व से जोड़कर देखता है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान कोई कमजोर देश नहीं है जहां कोई बाहरी ताकत आकर आसानी से सैन्य कार्रवाई कर सके. उनका दावा था कि पाकिस्तान की स्थिति किसी छोटे या अस्थिर देश जैसी नहीं है.


