ईरान में बाइक राइडर इन्फ्लुएंसर डायना की गोली मारकर हत्या, सरकार ने परिवार पर बयान बदलने का बनाया दबाव

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच बाइक राइडर इन्फ्लुएंसर डायना की गोली मारकर हत्या कर दी गई. डायना सरकार के खिलाफ इस प्रदर्शन में शामिल हुई थी, जिसके बाद उनपर गोलियों की बौछार क्र दी गई.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: ईरान में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक दुखद घटना ने सबका ध्यान खींचा है. 19 साल की डायना बहादोरी, जो सोशल मीडिया पर 'बेबी राइडर' के नाम से जानी जाती थी, सुरक्षा बलों द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई है. उनकी इंस्टाग्राम पर 1.44 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे वे इसपे  सुपरबाइक्स चलाने के शानदार वीडियो पोस्ट करती थी, जिनमें उनकी बहादुरी और स्टाइल साफ दिखता था.

प्रदर्शनों में भागीदारी में हुई मौत

ईरान में 9 जनवरी 2026 को डायना विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आधी रात के आसपास सुरक्षा बलों ने उन पर दो बार गोली चलाई. परिवार ने दो दिन तक उन्हें ढूंढा और 11 जनवरी को उनका शव मिला.

ईरानी मीडिया और कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह हत्या खामेनेई सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को दबाने का हिस्सा थी. प्रदर्शनकारियों पर मशीन गन और भारी हथियारों से हमला किया गया, जिससे कई लोग मारे गए.

शव के लिए दबाव में आया परिवार 

हैरानी बात यह है कि डायना के इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट में उनकी मौत को "दुर्घटना" बताया गया. पोस्ट में लिखा था कि यह एक हादसा था और अफवाहें न फैलाएं लेकिन परिवार और स्थानीय स्रोतों का कहना है कि सरकार ने शव सौंपने के बदले इस बयान को जारी करने के लिए दबाव डाला गया. डायना का अंतिम संस्कार भी गुप्त तरीके से किया गया.

ईरानी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

ईरानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने इस घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि डायना का एकमात्र 'अपराध' यह था कि वे इस्लामी तानाशाही के शासन में पैदा हुई. उन्होंने ट्वीट में लिखा कि 19 साल की डायना को मुल्ला शासन की मिलिशिया ने मार डाला, जबकि उनका अकाउंट 'बेबी राइडर' 1 लाख से ज्यादा लोगों को जोड़ता था.

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन

दिसंबर 2025 के अंत से ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. शुरुआत ईरानी रियाल के गिरने और महंगाई से हुई, लेकिन जल्द ही यह खामेनेई सरकार, मानवाधिकारों की कमी और महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों के खिलाफ हो गया. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे जा चुके हैं और कई अभी भी लापता हैं.

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