रूसी तेल टैंकरों पर यूक्रेनी ड्रोन हमला...तुर्की सरकार ने की कड़ी निंदा, कहा- हमारे हितों को खतरा
काला सागर में तुर्की के विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर यूक्रेन ने रूसी शैडो फ्लीट के दो तेल टैंकरों—केरोस और विराट—पर ड्रोन हमले किए, जिसकी तुर्की ने कड़ी निंदा की. दोनों जहाजों में आग और धुआं भरने की घटनाएं हुईं, हालांकि सभी क्रू मेंबर सुरक्षित रहे.

नई दिल्ली : काला सागर में यूक्रेन और रूस के बीच जारी तनाव उस समय और बढ़ गया जब यूक्रेन ने ड्रोन के जरिए रूसी शैडो फ्लीट के दो तेल टैंकरों केरोस (Koeros) और विराट (Virat) को निशाना बनाया. ये हमले तुर्की के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर हुए, जिसके बाद तुर्की सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे नौवहन सुरक्षा व पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया.
हमले काला सागर को युद्ध क्षेत्र में बदल सकते हैं
25 क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित
शुक्रवार रात लगभग 28 समुद्री मील दूर तुर्की तट से, मिस्र से रूस जा रहा खाली टैंकर केरोस बाहरी धमाके के कारण आग की चपेट में आ गया. जहाज पर सवार 25 क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं. तुर्की की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने तेज़ी से बचाव कार्य शुरू किया. अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो जहाज डूब भी सकता है.
विराट टैंकर की स्थिति, इंजन रूम में धुआं
दूसरा टैंकर विराट तुर्की तट से 35 समुद्री मील दूर क्षतिग्रस्त हुआ. चालक दल ने इंजन रूम में भारी धुआं भरने की जानकारी दी. इस जहाज के 20 क्रू मेंबर्स भी सुरक्षित बताए गए हैं और एक व्यापारी जहाज तथा बचाव टीमें तुरंत सहायता के लिए भेज दी गईं.
यूक्रेन ने हमले की जिम्मदारी
यूक्रेन ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि उसके सर्फेस नौसैनिक ड्रोन इन दोनों टैंकरों पर हमले के लिए जिम्मेदार थे. यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही रूसी नौसेना और उसके जहाजों को नुकसान पहुँचाने के लिए समुद्री ड्रोन का व्यापक उपयोग कर रहा है. अब तक ये ऑपरेशन उत्तरी काला सागर तक सीमित थे, लेकिन इस बार हमला तुर्की जलक्षेत्र के समीप किया गया, जिसने हालात को और संवेदनशील बना दिया है.
काला सागर में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
इस घटना ने तुर्की, रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है. तुर्की इसे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा मान रहा है, जबकि यूक्रेन इसे रूस के खिलाफ अपने सैन्य अभियान का हिस्सा बता रहा है. वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि यदि काला सागर में संघर्ष का दायरा बढ़ता है, तो इसके भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं.


