क्रिसमस को X-Mas कहने की असली वजह क्या है? जानें सदियों पुराना इस रहस्य का हैरान करने वाला राज

हर साल 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम और खुशियों के साथ मनाया जाता है. इस खास दिन को संता क्लॉज बच्चों के लिए तोहफों की बारिश करते हैं, घरों में क्रिसमस ट्री सजाए जाते हैं, और रंग-बिरंगी लाइटें जगमगा उठती हैं. लोग चर्च में जाते हैं, मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करते हैं और एक-दूसरे को प्यार भरे गिफ्ट्स देते हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: हर साल 25 दिसंबर को दुनियाभर में क्रिसमस डे बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यह ईसाई समुदाय का प्रमुख पर्व है, जिसे प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन घरों में खास सजावट होती है, चर्चों में प्रार्थनाएं और कैंडल जलाने की परंपरा निभाई जाती है, जबकि बच्चों को सांता क्लॉज का बेसब्री से इंतजार रहता है.

लेकिन क्रिसमस से जुड़ा एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि हम संदेशों और कार्ड्स में Christmas की जगह X-Mas क्यों लिखते हैं? आमतौर पर इसे शॉर्ट फॉर्म समझ लिया जाता है, जबकि इसके पीछे इतिहास, भाषा और धर्म से जुड़ी एक गहरी और दिलचस्प कहानी छिपी है.

X-Mas का असली मतलब क्या है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि X कोई सामान्य अंग्रेजी अक्षर नहीं है. यह ग्रीक भाषा के एक महत्वपूर्ण अक्षर ‘ची’ (उच्चारण: ‘की’) का प्रतीक है, जिसे अंग्रेजी में X जैसा लिखा जाता है.

ग्रीक भाषा में Christ (क्राइस्ट) शब्द का पहला अक्षर यही ‘ची’ है. इसी वजह से सदियों पहले से X को ईसा मसीह का प्रतीक माना जाता रहा है.

कैसे शुरू हुई X-Mas लिखने की परंपरा?

आज की तरह पहले कंप्यूटर, प्रिंटर या डिजिटल साधन नहीं थे. मध्यकाल में हर चीज हाथ से लिखी जाती थी, चाहे वह धर्मग्रंथ हों, दस्तावेज या पत्र. ऐसे में लंबे शब्दों को छोटा लिखने की जरूरत महसूस हुई. धर्मग्रंथ लिखने वाले लोग Christ जैसे लंबे शब्द को बार-बार लिखने के बजाय उसका पहला अक्षर ‘ची’ (X) इस्तेमाल करने लगे. धीरे-धीरे यह तरीका आम हो गया.

11वीं शताब्दी तक आते-आते Christmas को Xmas लिखने की परंपरा शुरू हो चुकी थी. बाद में जब प्रिंटिंग प्रेस आया, तब भी यह शॉर्ट फॉर्म चलता रहा, क्योंकि प्रिंटिंग में जगह की कीमत बहुत होती थी और छोटे शब्द लिखकर जगह बचाई जाती थी.

क्रिसमस का धार्मिक महत्व

क्रिसमस डे को यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि 25 दिसंबर को माता मरियम ने बेथलहम में यीशु को जन्म दिया था.

इतिहास के अनुसार, 336 ईस्वी के आसपास सम्राट कॉन्स्टेंटाइन के समय से क्रिसमस को बड़े स्तर पर मनाने की परंपरा शुरू हुई. तभी से यह दिन प्रेम, करुणा और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. अब जब भी आप X-Mas लिखा देखें, तो यह जान लें कि यह कोई आधुनिक शॉर्टकट नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और गहरे अर्थ से जुड़ा शब्द है, जिसमें इतिहास, भाषा और आस्था की कहानी छिपी है.

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