रोहित अपने इस अंदाज से लूट ले गए फैन्स का दिल, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

वानखेड़े के कार्यक्रम में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा, रवि शास्त्री और सचिन तेंदुलकर समेत कई दिग्गज शामिल हुए. इस दौरान रोहित का एक अंदाज फैंस को बहुत पसंद आया. इसके लिए उनकी तारीफ भी हो रही है. 

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में क्रिकेट के सितारों की महफ़िल सजी थी और मौका था वानखेड़े स्टेडियम के गोल्डन जुबली का, जी हां वानखेड़े स्टेडियम के 50 साल पूरे होने पर टीम इंडिया के वो सभी सितारे जिनका वानखेड़े से रिश्ता रहा है.वानखेड़े के कार्यक्रम में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा, रवि शास्त्री और सचिन तेंदुलकर समेत कई दिग्गज शामिल हुए. इस दौरान रोहित का एक अंदाज फैंस को बहुत पसंद आया. इसके लिए उनकी तारीफ भी हो रही है. 

मंच पर रोहित शर्मा को जब बुलाया गया तब रोहित मंच पर पहुँचने के साथ ही रवि शास्त्री की ओर बढ़े और बदले में पूर्व भारतीय कोच शास्त्री ने रोहित को अपने बगल में बैठने का इशारा किया लेकिन, रोहित ने रवि शास्त्री के प्रति सम्मान दिखते हुए उन्हें बगल के कुर्सी से उठाकर उन्हें बीच की कुर्सी पर ले जाकर बैठाया और तब उनके बगल में बैठे. रोहित शर्मा के इस अंदाज़ की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है और फैंस के द्वारा इसका वीडियो लगातार शेयर किया जा रहा है.

खुली बस में विश्वकप ट्रॉफी लाना सबसे यादगार पल

इस बीच जब 2025 चैंपियंस ट्रॉफी को मंच पर लाया गया और लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया, तो रोहित ने कहा कि उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक मरीन ड्राइव के आसपास खुली छत वाली बस की सवारी के बाद 2024 टी20 विश्व कप को वानखेड़े लाना था.

चैंपियंस ट्रॉफी पर क्या बोले रोहित?

रोहित ने वानखेड़े स्टेडियम की सालगिरह पर चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर भी प्रतिक्रिया दी. रोहित ने कहा, ''हम हमारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं. आईसीसी ट्रॉफी में भारत की ओर से खेलना हमेशा से सपना रहा है. हम एक और सपना साकार करेंगे. मुझे यकीन है कि जब हम दुबई पहुंचेंगे तो पूरा देश हमारे साथ होगा. हम वानखेड़े में ट्रॉफी को फिर से वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे.''

वानखेड़े में बचपन से क्रिकेट देखा है

रोहित ने कहा, "वानखेड़े एक ऐसा मैदान है जहां हर क्रिकेटर यहां खेलने और उन्हें हकीकत में बदलते देखने का सपना देखता है. सपने देखना और उन्हें हकीकत में बदलते देखना अच्छा है और मैंने बचपन से ही क्रिकेट देखा और खेला है क्योंकि इस मैदान का माहौल बहुत अलग है. हर क्रिकेटर यहां आकर क्रिकेट खेलना पसंद करता है और वानखेड़े में आपको यही एहसास होता है."

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