बिहार में एनडीए के करीब जाते तेज प्रताप यादव! मकर संक्राति पर दही-चूड़ा भोज में डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को न्यौता
तेजप्रताप यादव मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज के जरिए लालू यादव की पुरानी परंपरा को नई राजनीतिक पहचान दे रहे हैं. डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को आमंत्रण देकर उन्होंने संवाद, सौहार्द और नई सियासी रणनीति के संकेत दिए हैं.

पटनाः जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के अध्यक्ष तेजप्रताप यादव एक बार फिर सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं. इस बार वजह है मकर संक्रांति पर होने वाला उनका दही-चूड़ा भोज, जिसके जरिए वे अपने पिता लालू प्रसाद यादव की वर्षों पुरानी परंपरा को न केवल जीवित रखने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि उसे अपनी नई राजनीतिक पहचान से भी जोड़ रहे हैं. खास बात यह है कि इस आयोजन के लिए उन्होंने सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को भी आमंत्रित किया है.
डिप्टी सीएम के घर पहुंचा निमंत्रण
तेजप्रताप यादव खुद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के सरकारी आवास पहुंचे और 14 जनवरी को आयोजित दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया. उन्होंने पारंपरिक तिलक लगाकर मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं और कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया. यह मुलाकात भले ही कुछ ही मिनटों की रही हो, लेकिन इसके राजनीतिक संकेतों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सत्ता पक्ष के एक बड़े चेहरे के पास जाकर व्यक्तिगत रूप से न्योता देना सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं आगे माना जा रहा है.
राजनीति से ऊपर सामाजिक संदेश
इस मुलाकात के बाद तेजप्रताप यादव ने पत्रकारों से बातचीत में साफ कहा कि त्योहार समाज को जोड़ने के लिए होते हैं, न कि तोड़ने के लिए. उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन संस्कार, परंपरा और आपसी सम्मान भी उतने ही जरूरी हैं. उनके इस बयान को राजनीतिक कटुता के बीच संवाद और सौहार्द का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि तेजप्रताप अब केवल विरोध की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि व्यापक सामाजिक अपील बनाना चाहते हैं.
जेजेडी के बैनर तले पहला बड़ा आयोजन
यह दही-चूड़ा भोज इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब तेजप्रताप यादव अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के बैनर तले इस तरह का राजनीतिक-सामाजिक आयोजन कर रहे हैं. इससे पहले वे राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश से भी मुलाकात कर उन्हें भोज का न्योता दे चुके हैं. दीपक प्रकाश, रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं और विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य न होते हुए भी मंत्री पद संभाल रहे हैं. इन मुलाकातों को तेजप्रताप की नई राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
लालू यादव की विरासत को नया रूप
लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक दौर में दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति का एक अहम प्रतीक रहा है, जहां वैचारिक विरोधी भी एक साथ बैठकर भोजन करते नजर आते थे. उस परंपरा ने राजनीति में मानवीय रिश्तों और संवाद की अहमियत को दर्शाया था. अब तेजप्रताप यादव उसी विरासत को नए संदर्भ और नई पार्टी के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका यह कदम आने वाले समय में बिहार की राजनीति में नई समीकरणों और संभावनाओं की ओर इशारा करता है.


