RLM को बचाने के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने उठाया बड़ा कदम, इस विधायक को दी बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में चल रही खटपट को दूर करने के लिए और RLM को बचाने के लिए राजपूत समाज से आने वाले दिनारा के विधायक आलोक कुमार सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है. इसके साथ ही कुशवाहा ने दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

बिहार : पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी में चल रही अंदरूनी खटपट को समाप्त करने के लिए संगठनात्मक बदलाव किए हैं. इसके तहत उन्होंने दिनारा से विधायक आलोक सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह कदम विशेष रूप से बिहार की सियासत में कुर्मी और कोइरी जातियों (लव-कुश समीकरण) पर केंद्रित रालोमो की रणनीति को संतुलित करने के लिए उठाया गया है.

आलोक सिंह को बनाया प्रदेश अध्यक्ष
आपको बता दें कि कुशवाहा ने दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष के जिम्मेदारी संभाल रहे मदन चौधरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद दिया गया है. शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपेंद्र कुशवाहा ने यह जानकारी साझा की. इस बदलाव से पार्टी में पिछले कुछ महीनों से चल रही नाराजगी और टूट की आशंका को कम करने की कोशिश की गई है.

विधायोकों की नाराजगी दूर करने की कोशिश                                                      रालोमो में खटपट नवंबर 2025 में बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद शुरू हुई थी. कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद कई पदाधिकारी नाराज हुए और पार्टी छोड़ दी. इसके अलावा, पार्टी के चार विधायकों में से तीन – माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो – कुशवाहा से नाराज बताए गए. इन विधायकों की भाजपा के नेताओं से मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आईं, जिससे पार्टी में टूट की आशंका बढ़ गई थी.


विधायकों को मनाने में लगे हैं कुशवाहा 
कुशवाहा ने 16 जनवरी को माधव आनंद और आलोक सिंह को अपने आवास पर बुलाया और उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास किया. हालांकि, रामेश्वर महतो उस बैठक में शामिल नहीं हुए. अब आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का निर्णय पार्टी में संतुलन कायम करने और विधायकों को मनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

जातिगत समीकरण के तहत रणनीति
रालोमो की राजनीति हमेशा पिछड़ा वर्ग, खासकर कुर्मी और कोइरी जातियों पर केंद्रित रही है. इसे लव-कुश समीकरण कहा जाता है. पार्टी में अब राजपूत नेता आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाना जातिगत संतुलन का कदम माना जा रहा है. बिहार में कुशवाहा यानी कोइरी जाति की आबादी लगभग 4.2 प्रतिशत है, कुर्मी 2.87 प्रतिशत और राजपूत 3.45 प्रतिशत है. इस निर्णय से पार्टी का जातिगत संतुलन बनाए रखने और सत्ता समीकरण में मजबूती लाने की कोशिश की जा रही है.

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