8000 मामले, 78 मौतें...सबसे ज्यादा इन राज्यों में होती है रैगिंग, हैरान कर देंगे ये आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक (जनवरी 2012 से अक्टूबर 2023 तक) रैगिंग के कारण 78 छात्रों की मौत हो चुकी है और इस मामले में महाराष्ट्र सबसे ऊपर है, जहां 10 मौतें हुई हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में सात-सात, तेलंगाना में छह, आंध्र प्रदेश में पांच और मध्य प्रदेश में चार मौतें हुई हैं. आपको बता दें कि 2012 से 2022 के बीच रैगिंग की शिकायतों में 208 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

हर साल सैकड़ों छात्रों की जान लेने वाली रैगिंग पूरे देश में एक गंभीर समस्या बन गई है. इससे छात्रों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है. हाल ही में केरल के कोट्टायम के सरकारी नर्सिंग कॉलेज और तिरुवनंतपुरम के सरकारी कॉलेज करयावट्टोम में रैगिंग की घटनाओं ने एक बार फिर इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है.
देश में हर साल रैगिंग के कारण कई युवाओं की मौत हो जाती है. जानकारी के अनुसार स्थिति इतनी भयावह है कि पिछले एक दशक में यूजीसी हेल्पलाइन पर रैगिंग की 8,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं. 2012 से 2022 के बीच रैगिंग की शिकायतों में 208 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2022 में कुल 1,103 शिकायतें प्राप्त हुईं और अक्टूबर 2023 तक 756 शिकायतें दर्ज की गईं.
रैगिंग में यूपी सबसे ऊपर
महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी रैगिंग के कारण मौतों की खबरें आई हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक (जनवरी 2012 से अक्टूबर 2023 तक) रैगिंग के कारण 78 छात्रों की मौत हो चुकी है और इस मामले में महाराष्ट्र सबसे ऊपर है, जहां 10 मौतें हुई हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में सात-सात, तेलंगाना में छह, आंध्र प्रदेश में पांच और मध्य प्रदेश में चार मौतें हुई हैं. रैगिंग की शिकायतों की संख्या भी सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में है, जहां 1,202 शिकायतें मिली हैं, इसके बाद मध्य प्रदेश (795), पश्चिम बंगाल (728) और ओडिशा (517) का स्थान है.
क्या बोले यूसीजी के चेयरमैन?
यूजीसी के चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि रैगिंग के खिलाफ लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ यूजीसी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संस्थानों को भी इस बुराई को गंभीरता से लेना चाहिए और एंटी रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए.
यूजीसी के चेयरमैन ने कहा, "नियमित सलाह से लेकर अनुवर्ती कार्रवाई तक, यूजीसी अपने एंटी-रैगिंग कार्यक्रम में निरंतर सुधार पर काम कर रहा है, लेकिन संस्थानों की भी जिम्मेदारी है कि वे इस समस्या को दूर करने के लिए इसके नियमों का अक्षरशः पालन करें." उन्होंने कहा, "रैगिंग की समस्या के मूल कारण को संबोधित करना भी उतना ही आवश्यक है. संस्थानों के भीतर एंटी-रैगिंग नियमों के कमजोर क्रियान्वयन से अपराधियों को सुरक्षित मार्ग मिल सकता है."


