भारत में फॉरेन फंडिंग पर सियासी घमासान, मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस ने लिया विदेशी ताकतों का सहारा!
BJP vs Congress: भाजपा ने कांग्रेस पर 2014 में नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए विदेशी धन लेने का आरोप लगाया है. यह विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को "मतदाता मतदान" के लिए 21 मिलियन डॉलर देने पर सवाल उठाया. वहीं, कांग्रेस ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए सरकार से यूएसएआईडी फंडिंग पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है.

BJP vs Congress: भारत में विदेशी धन के प्रवाह को लेकर सियासी तापमान चढ़ गया है. भाजपा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 2014 में नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए उसने विदेशी ताकतों से फंडिंग मांगी थी. यह विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे के बाद और तेज हो गया, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया कि बाइडेन प्रशासन ने भारत में "मतदाता मतदान" के लिए 21 मिलियन डॉलर क्यों खर्च किए. ट्रंप ने संदेह जताया कि क्या यह किसी अन्य को चुनाव जिताने की कोशिश थी.
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भारत सरकार से यूएसएआईडी फंडिंग पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इसे "निरर्थक" करार दिया और सरकार से दशकों से भारत में सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को मिले अमेरिकी फंडिंग का पूरा ब्योरा देने की मांग की.
भाजपा ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान भारत को 204.28 मिलियन डॉलर की विदेशी सहायता मिली थी, जबकि गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को 2114.96 मिलियन डॉलर मिले. 2014 में एनडीए सरकार बनने के बाद यह प्रवाह धीमा हो गया. सरकारी फंडिंग घटकर 1 मिलियन डॉलर रह गई, लेकिन एनजीओ को मिलने वाली विदेशी फंडिंग बढ़कर 2579.73 मिलियन डॉलर हो गई.
सूत्रों के अनुसार, जॉर्ज सोरोस से जुड़े संगठन ओसीसीआरपी (OCCRP) को भी अपनी स्थापना के बाद से 47 मिलियन डॉलर की विदेशी सहायता मिली. भाजपा का आरोप है कि इस संगठन ने सरकार विरोधी रिपोर्ट तैयार कीं, जिनका इस्तेमाल कांग्रेस ने एनडीए सरकार को घेरने के लिए किया.
क्या विदेशी धन से सरकार विरोधी मुहिम चलाई गई?
भाजपा ने दावा किया कि मोदी सरकार बनने के बाद विदेशी फंडिंग का उपयोग गैर-सरकारी संगठनों और अन्य माध्यमों से भारत में "भारत विरोधी और राष्ट्र विरोधी" मंचों को आर्थिक सहायता देने के लिए किया गया. पार्टी के अनुसार, यूएसएआईडी की प्राथमिकता अब सरकारी मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय विपक्षी दलों और एनजीओ को समर्थन देने की ओर शिफ्ट हो गई है.
कांग्रेस का पलटवार, सरकार से मांगा श्वेत पत्र
कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए केंद्र सरकार से यूएसएआईडी फंडिंग पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करने की मांग की. जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "यूएसएआईडी इन दिनों काफी चर्चा में है. इसकी स्थापना 3 नवंबर 1961 को हुई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए गए दावे हास्यास्पद हैं, लेकिन फिर भी भारत सरकार को एक श्वेत पत्र जारी कर दशकों से सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को मिले विदेशी फंडिंग का पूरा विवरण देना चाहिए."
ट्रंप के बयान से गरमाई सियासत
अमेरिकी अरबपति और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क के नेतृत्व वाले सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) ने 16 फरवरी को एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें उन मदों की सूची थी, जिन पर अमेरिकी करदाताओं का पैसा खर्च किया गया. इस सूची में "भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर" का जिक्र था.
गुरुवार को ट्रंप ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, "हमें भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर खर्च करने की क्या जरूरत है? मुझे लगता है कि वे किसी और को निर्वाचित कराने की कोशिश कर रहे थे."
क्या यह मामला चुनावी हस्तक्षेप से जुड़ा है?
इस पूरे विवाद ने भारत में विदेशी फंडिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है. जहां भाजपा इसे "सरकार विरोधी साजिश" करार दे रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक हथकंडा बता रही है. अब देखना होगा कि सरकार इस पर कोई श्वेत पत्र जारी करती है या नहीं, और क्या यह विवाद 2024 के लोकसभा चुनावों पर असर डाल सकता है.


