किसी के साथ नहीं होने देंगे अन्याय...UGC के नए नियमों पर बोले BJP नेता सुधांशु त्रिवेदी
BJP राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के विवादित इक्विटी रेगुलेशन पर कमेंट करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचारधीन है और कोर्ट ने स्टे ऑर्डर जारी किया है, इसलिए टिप्पणी करना सही नहीं है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि वह किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे.

नई दिल्ली : भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा जारी किए गए नए इक्विटी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. गुरुवार को कोर्ट ने इन नियमों को अस्पष्ट बताते हुए स्टे लगा दिया, जिसके बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी इस मुद्दे पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वह किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देगी.
सरकार न्याय करने के लिए पूरी तरह समर्पित
सुप्रीम कोर्ट ने UGC पर लगाई अंतरिम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशन पर अंतरिम रोक लगाते हुए इसे पहली नजर में अस्पष्ट करार दिया. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि इन नियमों के बहुत दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं, जो समाज को बांटने का काम कर सकते हैं. कोर्ट ने माना कि रेगुलेशन में कुछ अस्पष्टताएं हैं, जिनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. यह फैसला उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को रोकने के प्रयासों पर सवाल उठाता है, क्योंकि यूजीसी ने इन नियमों को कैंपस में समानता सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया था.
विपक्षी दलों ने SC के फैसले का स्वागत किया
विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जोरदार स्वागत किया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए टकराव पैदा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसे नियम लाकर सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे रही है.
UGC के नए नियमों से समाजिक तनाव
वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियमों से सामाजिक तनाव का माहौल बन गया था, और कोर्ट का रोक लगाना उचित कदम है. मायावती ने सुझाव दिया कि अगर यूजीसी सभी पक्षों को विश्वास में लेकर और जांच समिति में सामान्य वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर नियम लागू करती, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी.
अखिलेश यादव ने बताया न्याय की जीत
समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी फैसले की सराहना की, इसे सामाजिक न्याय की जीत बताया. तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी. हालांकि, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन ने जजों की कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई, मानते हुए कि ये टिप्पणियां पूर्वाग्रहपूर्ण लगती हैं. विपक्ष का यह एकजुट रुख दर्शाता है कि वे इस मुद्दे को भाजपा सरकार के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं, खासकर सामाजिक न्याय से जुड़े वोट बैंक को साधने के लिए.


