अलर्ट रहना चाहिए, कहीं खुद की खत्म न हो जाएं...मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति को दी कड़ी चेतावनी

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिका और इजरायल के द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर लगातार हमले किए जा रहे है. इस बीच ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा 'अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अलर्ट रहना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वह खुद ही खत्म हो जाएं.' 

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बारूद की गंध के बीच अब ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. हालिया घटनाक्रम में ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी और बड़ी चेतावनी दी है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक. तेहरान ने ट्रंप को अलर्ट रहने के लिए कहा है. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरानी ठिकानों को अपना निशाना बनाया है और स्थिति विस्फोटक है.

ईरान की ट्रंप को सीधी चेतावनी

आपको बता दें कि ईरान के सुरक्षा अधिकारी ने ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति बेहद सावधान रहना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि वह स्वयं ही इस संघर्ष में खत्म हो जाएं. तेहरान का कहना है कि यदि वॉशिंगटन ने अपनी सैन्य आक्रामकता कम नहीं की. तो अमेरिका को इसके गंभीर और ऐतिहासिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने ठिकानों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

ट्रंप की बीस गुना हमले की धमकी

दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी में रिपब्लिकन सांसदों के बीच अपना इरादा साफ कर दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध काफी छोटा और अल्पकालिक हो सकता है. लेकिन उन्होंने एक बड़ी चेतावनी यह भी दी कि अगर ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के रास्ते को बंद किया. तो अमेरिका ईरान पर अब तक के इतिहास का सबसे जोरदार हमला करेगा. ट्रंप ने कहा कि वे शैतानी ताकतों को कुचलने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.

कूटनीति के रास्ते हुए बंद

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ अब किसी भी तरह की बातचीत की गुंजाइश नहीं बची है. उन्होंने पीबीएस को दिए साक्षात्कार में कहा कि कूटनीति का अनुभव बहुत 'कड़वा' रहा है. अराघची ने वॉशिंगटन पर बार-बार विश्वासघात करने और सैन्य आक्रामकता दिखाने का आरोप लगाया. उनके अनुसार. अमेरिकियों के साथ वार्ता का कोई भी सवाल अब तेहरान के एजेंडे में नहीं है. क्योंकि वे कभी भी अपने वादों पर टिके नहीं रहते.

धोखे और विश्वासघात का आरोप

अराघची ने दावा किया कि पिछले वर्ष जून में ईरान ने परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अच्छे इरादे से बातचीत शुरू की थी. अमेरिका ने भरोसा दिलाया था कि वह हमला नहीं करेगा. लेकिन तीन दौर की सफल वार्ता के बावजूद अचानक हमला कर दिया गया. ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक. अमेरिकी वार्ता दल ने खुद माना था कि बातचीत में प्रगति हो रही है. लेकिन इसके बावजूद वॉशिंगटन ने सैन्य रास्ता चुनकर ईरान को धोखा दिया. जिससे अब विश्वास पूरी तरह खत्म है.

आत्मरक्षा में मिसाइल हमलों का संकल्प

ईरान ने फारस की खाड़ी के देशों को संदेश देते हुए कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर उनके हमले 'आत्मरक्षा' के अधिकार के तहत हैं. अराघची ने साफ कहा कि यह युद्ध ईरान ने नहीं शुरू किया. बल्कि उन पर थोपा गया है. उन्होंने गर्व के साथ कहा कि ईरानी जनता की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब तक जरूरत पड़ेगी. वे मिसाइल दागना जारी रखेंगे. ईरान अपने लोगों और सुविधाओं की रक्षा करने के लिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है.

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